भारत में गेहूं का आटा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच अब लोग हेल्दी विकल्प तलाश रहे हैं। खासतौर पर डायबिटीज और लिवर से जुड़ी दिक्कतों से बचाव के लिए
हरे कटहल का आटा और
क्विनोआ का आटा तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट भी इनके फायदों को मानते हैं।
1. हरे कटहल का आटा (Green Jackfruit Flour)
हरे कटहल से बना आटा लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI) वाला माना जाता है। इसका मतलब है कि यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता।
फायदे:
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ब्लड शुगर कंट्रोल में मददगार
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फाइबर से भरपूर, जिससे पाचन बेहतर होता है
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वजन नियंत्रण में सहायक
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फैटी लिवर के जोखिम को कम करने में मदद
हरे कटहल का आटा अक्सर गेहूं के आटे में मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है, जिससे रोटी या पराठे ज्यादा हेल्दी बनते हैं।
2. क्विनोआ का आटा (Quinoa Flour)
क्विनोआ एक सुपरफूड माना जाता है और इसका आटा पोषण से भरपूर होता है। यह प्रोटीन, फाइबर और जरूरी अमीनो एसिड का अच्छा स्रोत है।
फायदे:
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हाई प्रोटीन कंटेंट, जिससे मसल्स मजबूत
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लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स, डायबिटीज में फायदेमंद
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एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर, जो लिवर की सेहत के लिए अच्छे
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ग्लूटेन-फ्री, इसलिए ग्लूटेन संवेदनशील लोगों के लिए उपयुक्त
गेहूं से कैसे अलग?
साधारण गेहूं का आटा कार्बोहाइड्रेट में ज्यादा और फाइबर में अपेक्षाकृत कम हो सकता है (रिफाइंड रूप में)। जबकि कटहल और क्विनोआ का आटा पोषक तत्वों से भरपूर और ब्लड शुगर फ्रेंडली विकल्प माने जाते हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, इन आटे को पूरी तरह गेहूं की जगह लेने की बजाय मिक्स करके इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद है। इससे स्वाद भी बना रहता है और पोषण भी बढ़ता है।
निष्कर्ष
अगर आप डायबिटीज, फैटी लिवर या वजन बढ़ने जैसी समस्याओं से बचना चाहते हैं, तो हरे कटहल और क्विनोआ के आटे को अपनी डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, किसी भी बड़े आहार बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेना बेहतर है।
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