अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी तनाव अब ऑटोमोबाइल सेक्टर तक पहुंच गया है। अमेरिकी सरकार ने कारों में इस्तेमाल हो रही चीनी तकनीक (Chinese Technology) को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सरकार को आशंका है कि चीनी टेक्नोलॉजी के जरिए अमेरिकी नागरिकों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील डेटा जासूसी के खतरे में पड़ सकता है। इसी वजह से अब कार निर्माताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे तय समयसीमा के भीतर चीनी टेक्नोलॉजी को हटाएं।
17 मार्च तक की डेडलाइन तय
नए प्रस्तावित नियमों के तहत अमेरिकी सरकार ने ऑटो कंपनियों को 17 मार्च तक का समय दिया है। इस अवधि में कंपनियों को यह बताना होगा कि उनकी गाड़ियों में कहां-कहां चीनी सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर या डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है और उन्हें हटाने की क्या योजना है। यह नियम खासतौर पर कनेक्टेड वाहनों (Connected Cars) पर लागू होगा, जिनमें इंटरनेट, GPS, कैमरा, सेंसर और डेटा ट्रांसमिशन जैसी सुविधाएं होती हैं।
क्यों है सरकार को जासूसी का डर?
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक कारें अब सिर्फ वाहन नहीं रहीं, बल्कि चलती-फिरती डेटा मशीन बन चुकी हैं। ये गाड़ियां ड्राइवर की लोकेशन, ड्राइविंग पैटर्न, आवाज, कैमरा फुटेज और यहां तक कि निजी बातचीत से जुड़ा डेटा भी इकट्ठा कर सकती हैं। अगर इनमें चीनी तकनीक या सॉफ्टवेयर मौजूद है, तो यह डेटा विदेशी सर्वर तक पहुंच सकता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और प्राइवेसी दोनों को खतरा हो सकता है।
ऑटो कंपनियों और सप्लाई चेन पर असर
इस फैसले का असर सिर्फ अमेरिकी कार कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। कई ग्लोबल ऑटोमेकर अपनी गाड़ियों में चीनी कंपनियों से जुड़े सेंसर, चिप्स, इंफोटेनमेंट सिस्टम और AI सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में उन्हें अब नई सप्लाई चेन, वैकल्पिक टेक्नोलॉजी और अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है। इससे कारों की कीमतें बढ़ने और प्रोडक्शन में देरी की आशंका भी जताई जा रही है।
चीन पर बढ़ता तकनीकी दबाव
यह कदम अमेरिका की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह चीन की टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कम करना चाहता है। पहले 5G, सेमीकंडक्टर और ऐप्स को लेकर सख्ती देखी गई थी, अब ऑटो सेक्टर भी इसकी जद में आ गया है।
आगे क्या?
अगर यह नियम पूरी तरह लागू होता है, तो भविष्य में अमेरिका में बिकने वाली कारों की टेक्नोलॉजी संरचना पूरी तरह बदल सकती है। सरकार का साफ संदेश है—डेटा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा, चाहे कीमत कुछ भी क्यों न चुकानी पड़े। अब देखना होगा कि ऑटो कंपनियां इस डेडलाइन और नई चुनौतियों से कैसे निपटती हैं
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