ट्रंप के न्योते पर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होगा भारत? विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब


 भारत और अमेरिका के रिश्तों में हालिया महीनों में आई तल्खी अब कम होती दिखाई दे रही है। टैरिफ में कटौती और नए व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के संबंध एक बार फिर पटरी पर लौटते नजर आ रहे हैं। इसी बीच गाजा के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत की संभावित भागीदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

यह पहल अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump से जुड़ी बताई जा रही है, जिसका उद्देश्य गाजा क्षेत्र में स्थिरता और पुनर्निर्माण प्रयासों को समन्वित करना है। इस संदर्भ में यह सवाल उठने लगा कि क्या भारत इस बहुपक्षीय मंच का हिस्सा बनेगा।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

इस मुद्दे पर भारत के Ministry of External Affairs ने स्पष्ट किया कि भारत पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और मानवीय सहायता के पक्ष में है। मंत्रालय ने कहा कि भारत की नीति लंबे समय से दो-राष्ट्र समाधान और संवाद के जरिए स्थायी शांति की रही है।

हालांकि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में औपचारिक रूप से शामिल होने को लेकर मंत्रालय ने कोई सीधी पुष्टि नहीं की, लेकिन यह जरूर संकेत दिया कि भारत किसी भी ऐसी पहल का समर्थन करेगा जो क्षेत्र में स्थिरता और पुनर्निर्माण को बढ़ावा दे।

बदले हालात, बेहतर रिश्ते

भारत और United States के बीच हाल में व्यापारिक तनाव कम हुआ है। टैरिफ में रियायत और नए समझौते के बाद दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते मजबूत होने की दिशा में बढ़ रहे हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

गाजा संकट के मद्देनजर भारत ने पहले भी मानवीय सहायता भेजी है और नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया है। भारत की विदेश नीति संतुलन, संवाद और बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित रही है।

कुल मिलाकर, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत की भागीदारी को लेकर अंतिम निर्णय भले स्पष्ट न हो, लेकिन विदेश मंत्रालय के बयान से यह साफ है कि भारत शांति और पुनर्निर्माण के प्रयासों में रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है—बशर्ते यह उसकी दीर्घकालिक नीतिगत प्राथमिकताओं के अनुरूप हो।

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