आज के डिजिटल दौर में इयरफोन और हेडफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। म्यूजिक सुनना हो, ऑनलाइन क्लास लेनी हो या कॉल पर बात करनी हो—अधिकतर लोग घंटों तक इयरफोन लगाए रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनका गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है?
कैसे होता है नुकसान?
जब हम लंबे समय तक तेज आवाज में ऑडियो सुनते हैं, तो कान के अंदर मौजूद बेहद नाजुक हेयर सेल्स (Hair Cells) पर दबाव पड़ता है। ये सेल्स ध्वनि को दिमाग तक पहुंचाने का काम करती हैं। लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से ये स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे सुनने की क्षमता कम हो सकती है या स्थायी बहरापन भी हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार 85 डेसिबल से ऊपर की आवाज को लंबे समय तक सुनना नुकसानदायक हो सकता है। कई बार लोग 100 डेसिबल से अधिक वॉल्यूम पर म्यूजिक सुनते हैं, जो बेहद खतरनाक है।
क्या है 60-60 नियम?
डॉक्टर और ऑडियोलॉजिस्ट अक्सर “60-60 नियम” अपनाने की सलाह देते हैं:
इसके बाद कम से कम 10–15 मिनट का ब्रेक जरूर लें।
किन लक्षणों पर दें ध्यान?
यदि ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
बचाव के उपाय
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नॉइज़ कैंसिलेशन हेडफोन का उपयोग करें ताकि वॉल्यूम कम रखा जा सके
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सोते समय इयरफोन का इस्तेमाल न करें
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बच्चों को कम उम्र में लंबे समय तक हेडफोन न दें
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नियमित रूप से सुनने की जांच कराएं, खासकर यदि पेशेवर रूप से ऑडियो उपकरण का उपयोग करते हैं
निष्कर्ष
इयरफोन का सीमित और सावधानीपूर्वक उपयोग सुरक्षित है, लेकिन लापरवाही गंभीर सुनने की समस्या पैदा कर सकती है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर आप अपनी सुनने की क्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।
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