बच्चों का स्क्रीन टाइम अब सरकार तय करेगी? इस राज्य ने तैयार किया खास प्लान


 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Facebook, Instagram और Snapchat आज बच्चों और किशोरों की दिनचर्या का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन और दोस्तों से जुड़ाव तक—हर काम में इनका इस्तेमाल बढ़ गया है। लेकिन लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ते असर को लेकर अब सरकारें सख्त कदम उठाने की तैयारी में हैं।

क्यों बढ़ी चिंता?

विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग से

  • ध्यान केंद्रित करने में कमी

  • नींद की समस्या

  • चिंता और अवसाद

  • साइबर बुलिंग का खतरा

  • अनुचित कंटेंट की पहुंच

जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। यही वजह है कि अब बच्चों के डिजिटल उपयोग को नियंत्रित करने की मांग तेज हो गई है।

क्या है राज्य का प्लान?

एक राज्य सरकार ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को लेकर व्यापक नीति का खाका तैयार किया है। प्रस्तावित योजना के तहत:

  • नाबालिगों के लिए प्रतिदिन निर्धारित स्क्रीन टाइम सीमा तय की जा सकती है

  • देर रात सोशल मीडिया एक्सेस पर रोक लगाई जा सकती है

  • आयु सत्यापन (Age Verification) को अनिवार्य बनाया जा सकता है

  • माता-पिता को मॉनिटरिंग टूल्स उपलब्ध कराए जा सकते हैं

सरकार का उद्देश्य पूर्ण प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि सुरक्षित और संतुलित डिजिटल वातावरण तैयार करना है।

प्लेटफॉर्म्स पर भी बढ़ेगा दबाव

संभावना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों के लिए अलग एल्गोरिद्म, समय सीमा अलर्ट और सख्त प्राइवेसी सेटिंग्स लागू करनी पड़ें। इससे प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।

क्या यह फैसला सही है?

कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि स्क्रीन टाइम सीमित करना जरूरी है, लेकिन इसका संतुलित और व्यवहारिक मॉडल बनाना होगा। वहीं, आलोचकों का कहना है कि अत्यधिक नियंत्रण बच्चों की डिजिटल स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है।

निष्कर्ष

बच्चों के बढ़ते सोशल मीडिया उपयोग को देखते हुए सरकारों की चिंता वाजिब है। आने वाले समय में डिजिटल अनुशासन और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर और भी सख्त नियम देखने को मिल सकते हैं। अब देखना होगा कि यह योजना कब और कैसे लागू होती है, और इसका बच्चों तथा परिवारों पर क्या प्रभाव पड़ता हैं 

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