बढ़ता स्क्रीन टाइम: रील्स और शॉर्ट वीडियो की लत बन सकती है सेहत के लिए खतरा


 डिजिटल दौर में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। औसतन एक व्यक्ति रोजाना करीब 2 से 4 घंटे मोबाइल स्क्रीन पर बिताता है, और इस समय का बड़ा हिस्सा रील्स और शॉर्ट वीडियो देखने में गुजरता है। कुछ सेकंड के मनोरंजक वीडियो से शुरू हुई यह आदत धीरे-धीरे रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है। हालांकि इसे अक्सर सिर्फ टाइमपास या हल्का-फुल्का मनोरंजन समझा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

रील्स और शॉर्ट वीडियो का फॉर्मेट ऐसा होता है कि वे बहुत कम समय में दिमाग को तेज उत्तेजना देते हैं। लगातार स्क्रॉल करने से मस्तिष्क में डोपामिन नामक रसायन बार-बार रिलीज होता है, जिससे व्यक्ति को तुरंत आनंद की अनुभूति होती है। यही कारण है कि लोग एक के बाद एक वीडियो देखते रहते हैं और समय का पता ही नहीं चलता। लेकिन लंबे समय तक ऐसा होने पर दिमाग की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। पढ़ाई या काम में मन न लगना, जल्दी बोरियत महसूस होना और एकाग्रता में कमी इसके आम संकेत हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर देखा गया है। सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमकदार और “परफेक्ट” जिंदगी को देखकर कई लोग अनजाने में अपनी तुलना दूसरों से करने लगते हैं। इससे आत्मविश्वास में कमी, तनाव और कभी-कभी अवसाद जैसी समस्याएं भी जन्म ले सकती हैं। लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से वास्तविक सामाजिक संपर्क भी कम हो जाता है, जो मानसिक संतुलन के लिए जरूरी होता है।

शारीरिक स्तर पर भी नुकसान कम नहीं है। लंबे समय तक मोबाइल देखने से आंखों में जलन, सिरदर्द, गर्दन और पीठ में दर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। देर रात तक रील्स देखने की आदत नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, जिससे हार्मोनल असंतुलन और थकान बढ़ सकती है। शारीरिक गतिविधि कम होने से मोटापे और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है।

इसलिए जरूरी है कि हम स्क्रीन टाइम को नियंत्रित रखें और डिजिटल कंटेंट का उपयोग संतुलित तरीके से करें। मनोरंजन जरूरी है, लेकिन अगर वह आदत बनकर हमारी सेहत पर असर डालने लगे, तो समय रहते सावधान होना ही बेहतर है।

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