पतंजलि का आयुर्वेदिक समाधान! दंतकांति गंडूष से स्वस्थ मुस्कान और मजबूत मसूड़ों का दावा


 आयुर्वेदिक उत्पादों की दुनिया में पतंजलि ने एक बार फिर दंत-स्वास्थ्य को लेकर अपना समाधान पेश किया है। पतंजलि दंतकांति गंडूष को पारंपरिक आयुर्वेदिक गंडूष परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संयोजन के रूप में पेश किया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि यह ऑयल पुलिंग प्रक्रिया मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस को कम करने में मदद कर सकती है, जिससे दांत, मसूड़े और सांस की सेहत बेहतर रहती है।

क्या है गंडूष परंपरा?
गंडूष आयुर्वेद की एक प्राचीन विधि है, जिसमें तेल या औषधीय द्रव को कुछ समय तक मुंह में रखकर कुल्ला किया जाता है। माना जाता है कि इससे मुंह की सफाई, मसूड़ों की मजबूती और ओरल हाइजीन में सुधार होता है। आधुनिक समय में इसे ऑयल पुलिंग के नाम से भी जाना जाता है।

दंतकांति गंडूष कैसे काम करता है?
पतंजलि के अनुसार, दंतकांति गंडूष में मौजूद आयुर्वेदिक तत्व मुंह के भीतर मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीवों पर असर डालते हैं। नियमित इस्तेमाल से दांतों की सफाई, मसूड़ों की देखभाल और बदबूदार सांस की समस्या में राहत मिलने का दावा किया जाता है। साथ ही, यह दंत समस्याओं की रोकथाम में सहायक बताया जाता है।

कंपनी के दावे क्या कहते हैं?
पतंजलि का कहना है कि दंतकांति गंडूष:

  • दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करता है

  • मुंह में बैक्टीरिया और फंगस की मात्रा कम करने में सहायक हो सकता है

  • सांस की दुर्गंध से राहत दिलाने में उपयोगी बताया जाता है
    हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी आयुर्वेदिक या वैकल्पिक उत्पाद को अपनाने से पहले दंत चिकित्सक से परामर्श लेना बेहतर होता है।

कैसे करें इस्तेमाल?
आमतौर पर गंडूष के लिए तेल को मुंह में लेकर 5–10 मिनट तक धीरे-धीरे घुमाया जाता है और फिर थूक दिया जाता है। इसके बाद गुनगुने पानी से कुल्ला किया जाता है। इसे सुबह खाली पेट करना अधिक प्रभावी माना जाता है।

डेंटल हेल्थ पर विशेषज्ञों की राय
डॉक्टरों के मुताबिक, ऑयल पुलिंग को दांतों की नियमित सफाई का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक उपाय के रूप में देखना चाहिए। ब्रश, फ्लॉस और समय-समय पर डेंटल चेकअप अब भी जरूरी हैं।

कुल मिलाकर, पतंजलि दंतकांति गंडूष को आयुर्वेदिक देखभाल पसंद करने वालों के लिए एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। स्वस्थ मुस्कान और मजबूत मसूड़ों के लिए जागरूकता, सही आदतें और संतुलित देखभाल ही सबसे अहम है।

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