आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, प्रदूषण और गलत लाइफस्टाइल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा रहे हैं। ऐसे में जापान की एक पारंपरिक और प्राकृतिक पद्धति दुनियाभर में चर्चा में है, जिसे ‘शिनरिन-यो’ कहा जाता है। इसे अंग्रेज़ी में Forest Bathing (फॉरेस्ट बाथिंग) कहा जाता है। जापानी लोग मानते हैं कि यह तरीका शरीर और मन को स्वस्थ रखकर बीमारियों, यहां तक कि कैंसर के खतरे को भी कम करने में मदद कर सकता है।
क्या है फॉरेस्ट बाथिंग (Shinrin-yoku)?
फॉरेस्ट बाथिंग का मतलब जंगल में जाकर नहाना नहीं है, बल्कि प्रकृति में समय बिताना है। इसमें पेड़ों, हरियाली, ताजी हवा, पक्षियों की आवाज़ और प्राकृतिक माहौल को पूरी तरह महसूस किया जाता है। जापान में इसे एक थेरेपी की तरह अपनाया जाता है, जिसमें इंसान धीरे-धीरे जंगल में टहलता है, गहरी सांस लेता है और प्रकृति से जुड़ता है।
कैंसर से बचाव में कैसे मदद करता है?
जापानी रिसर्च के अनुसार, जंगलों में मौजूद पेड़ फाइटोनसाइड्स (Phytoncides) नाम के प्राकृतिक तत्व छोड़ते हैं। जब इंसान इन्हें सांस के जरिए शरीर में लेता है, तो इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। खासतौर पर शरीर की Natural Killer (NK) Cells की एक्टिविटी बढ़ती है, जो कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
तनाव कम, इम्युनिटी ज्यादा
तनाव को कैंसर और कई अन्य बीमारियों की जड़ माना जाता है। फॉरेस्ट बाथिंग करने से कोर्टिसोल (Stress Hormone) का स्तर कम होता है। इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है, नींद बेहतर होती है और शरीर खुद को रिपेयर करने की स्थिति में आता है। जब तनाव कम होता है, तो इम्यून सिस्टम बेहतर तरीके से काम करता है।
मेंटल हेल्थ पर भी असर
फॉरेस्ट बाथिंग सिर्फ शरीर ही नहीं, दिमाग के लिए भी फायदेमंद है। यह डिप्रेशन, एंग्जायटी और मानसिक थकान को कम करने में मदद करता है। मानसिक रूप से स्वस्थ इंसान बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।
कैसे अपनाएं फॉरेस्ट बाथिंग?
इसके लिए जापान जाना जरूरी नहीं है। आप पास के किसी पार्क, जंगल, ग्रीन एरिया या पहाड़ी इलाके में सप्ताह में 2–3 बार 30–60 मिनट समय बिता सकते हैं। मोबाइल से दूरी बनाएं, गहरी सांस लें, पेड़ों को देखें और प्रकृति की आवाज़ों को महसूस करें।
निष्कर्ष
फॉरेस्ट बाथिंग कोई इलाज नहीं, बल्कि बीमारियों से बचाव की एक प्राकृतिक जीवनशैली है। यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर कैंसर समेत कई बीमारियों के खतरे को कम करने में सहायक हो सकती है।
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