गेमिंग के दौरान कौन-सा हार्मोन एक्टिव होता है और इससे शरीर में क्या बदलाव आते हैं?


 गेम खेलते समय हमारे दिमाग में सबसे ज्यादा डोपामिन (Dopamine) हार्मोन एक्टिव होता है। इसे आमतौर पर “फील गुड हार्मोन” कहा जाता है। जब कोई खिलाड़ी गेम में लेवल पूरा करता है, जीत हासिल करता है, नया रिवॉर्ड या अचीवमेंट पाता है, तो दिमाग तुरंत डोपामिन रिलीज करता है। यही वजह है कि गेम खेलते समय एक्साइटमेंट और खुशी महसूस होती है।

डोपामिन एक्टिव होने से बॉडी में क्या बदलाव होते हैं?

1. खुशी और मोटिवेशन बढ़ता है
डोपामिन दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को एक्टिव करता है। इससे खुशी महसूस होती है और खिलाड़ी बार-बार गेम खेलने के लिए मोटिवेट होता है।

2. फोकस और कॉन्सन्ट्रेशन तेज होता है
गेमिंग के दौरान दिमाग पूरी तरह टास्क पर फोकस करता है। डोपामिन की वजह से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता अस्थायी रूप से बढ़ जाती है।

3. दिल की धड़कन और एनर्जी लेवल बढ़ता है
एक्शन या कॉम्पिटिटिव गेम्स खेलते समय हार्ट रेट तेज हो जाती है और शरीर में एड्रेनालिन के साथ एनर्जी का फ्लो बढ़ता है।

4. आदत या लत बनने का खतरा
बार-बार डोपामिन रिलीज होने से दिमाग उसी “खुशी” को दोबारा पाने के लिए गेमिंग की मांग करता है। ज्यादा गेमिंग करने पर यही आदत धीरे-धीरे लत में बदल सकती है।

5. नींद और मूड पर असर
लंबे समय तक गेम खेलने से डोपामिन का बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स देखने को मिलते हैं।

क्या सिर्फ नुकसान ही है?

नहीं। लिमिट में गेमिंग करने से ब्रेन एक्टिव रहता है, रिफ्लेक्स बेहतर होते हैं और स्ट्रेस कम हो सकता है। समस्या तब शुरू होती है जब गेमिंग घंटों तक लगातार होने लगे और बाकी एक्टिविटीज को रिप्लेस कर दे।

निष्कर्ष:
गेमिंग के दौरान डोपामिन हार्मोन एक्टिव होता है, जो खुशी, एक्साइटमेंट और मोटिवेशन देता है। लेकिन जरूरत से ज्यादा गेमिंग शरीर और दिमाग दोनों पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इसलिए बैलेंस बनाकर खेलना ही सबसे हेल्दी तरीका है

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