डायबिटीज (मधुमेह) को अक्सर सिर्फ ब्लड शुगर की बीमारी समझा जाता है, लेकिन इसका असर शरीर के कई अंगों पर एक साथ पड़ता है। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से रक्त वाहिकाएं (ब्लड वेसल्स) और नसें (नर्व्स) धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। यही वजह है कि समय के साथ यह बीमारी दिमाग और हाथों की कार्यक्षमता पर भी असर डाल सकती है।
दिमाग पर असर: याददाश्त कमजोर होने का खतरा
लगातार बढ़ी हुई शुगर लेवल मस्तिष्क तक खून पहुंचाने वाली छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे:
कुछ शोधों में पाया गया है कि टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) क्षमताओं के कमजोर होने की आशंका ज्यादा होती है। इसका कारण मस्तिष्क में सूक्ष्म रक्त प्रवाह में कमी और इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी प्रक्रियाएं मानी जाती हैं।
हाथों की ताकत क्यों घटती है?
डायबिटीज नसों को प्रभावित कर सकती है, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। जब नसें कमजोर होती हैं, तो हाथों में:
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झुनझुनी या सुन्नपन
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पकड़ने की ताकत में कमी
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उंगलियों में अकड़न
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दर्द या जलन
जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। लंबे समय तक नियंत्रण न होने पर मांसपेशियों की शक्ति भी घट सकती है।
क्यों होता है ‘डबल अटैक’?
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हाई ब्लड शुगर से नसों को नुकसान
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ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन
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खराब ब्लड सर्कुलेशन
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इंसुलिन रेजिस्टेंस का असर
ये सभी मिलकर शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर एक साथ असर डालते हैं।
बचाव कैसे करें?
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ब्लड शुगर को नियमित रूप से मॉनिटर करें
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संतुलित आहार और नियमित व्यायाम अपनाएं
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समय पर दवाएं लें
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सालाना न्यूरोलॉजिकल और आंखों की जांच कराएं
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ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें
डायबिटीज एक साइलेंट लेकिन गंभीर बीमारी है। सही समय पर नियंत्रण और लाइफस्टाइल में सुधार से इसके ‘डबल अटैक’ से बचा जा सकता है। यदि हाथों में कमजोरी या याददाश्त में गिरावट जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
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