प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। इसी कड़ी में ट्रंप ने दावा किया कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच ‘जीरो टैरिफ’ की स्थिति बनेगी। लेकिन अब इस दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में कुछ और ही तस्वीर सामने आती दिख रही है।
क्या था ट्रंप का दावा?
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के बाद दोनों देश एक-दूसरे के उत्पादों पर कोई आयात शुल्क (टैरिफ) नहीं लगाएंगे। उनके इस बयान को ‘जीरो टैरिफ डील’ के तौर पर प्रचारित किया गया।
व्हाइट हाउस फैक्ट शीट में क्या निकला?
व्हाइट हाउस द्वारा जारी फैक्ट शीट के मुताबिक—
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समझौते में सभी वस्तुओं पर जीरो टैरिफ की बात नहीं कही गई है
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कुछ चुनिंदा सेक्टर्स में टैरिफ में कटौती या आसान बाजार पहुंच की बात जरूर है
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कई संवेदनशील क्षेत्रों में टैरिफ पहले की तरह लागू रहेंगे
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यह समझौता ज्यादा तर फेज़-वाइज (चरणबद्ध) और सशर्त बताया गया है
यानी, ट्रंप का ‘जीरो टैरिफ’ वाला दावा पूरी तरह सटीक नहीं माना जा रहा।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का असली फोकस
विशेषज्ञों के अनुसार इस डील का मकसद—
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दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना
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कुछ सेक्टर्स में शुल्क कम करना
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सप्लाई चेन और निवेश सहयोग मजबूत करना
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टेक्नोलॉजी, डिफेंस और एनर्जी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाना
लेकिन इसे फुल जीरो टैरिफ डील कहना फिलहाल सही नहीं है।
भारत के लिए इसका क्या मतलब?
भारत को इस समझौते से कुछ सेक्टर्स में फायदा मिल सकता है, लेकिन—
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घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए टैरिफ पूरी तरह खत्म नहीं होंगे
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अमेरिका को भी अपने किसानों और इंडस्ट्री के हितों को ध्यान में रखना होगा
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप का ‘जीरो टैरिफ’ बयान राजनीतिक रूप से आकर्षक जरूर है, लेकिन व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट बताती है कि हकीकत इससे काफी अलग है। यह समझौता टैरिफ खत्म करने से ज्यादा, व्यापार को संतुलित और आसान बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
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