पैरों में दर्द और सूजन को न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं किडनी फेलियर के शुरुआती संकेत


 आज के समय में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और हमारे देश की बड़ी आबादी इससे प्रभावित है। किडनी फेलियर अचानक नहीं होता, बल्कि इसके लक्षण धीरे-धीरे शरीर में दिखाई देने लगते हैं। खास बात यह है कि पैरों में दिखने वाले कुछ बदलाव और दर्द किडनी की खराबी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। अगर इन्हें समय रहते पहचान लिया जाए, तो बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

पैरों में सूजन (Swelling)
किडनी का काम शरीर से अतिरिक्त पानी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालना होता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती, तो शरीर में पानी जमा होने लगता है। इसका असर सबसे पहले पैरों, टखनों और पंजों में सूजन के रूप में दिखता है। सुबह उठते समय या लंबे समय तक बैठने के बाद अगर पैरों में ज्यादा सूजन महसूस हो, तो यह चेतावनी हो सकती है।

लगातार पैरों में दर्द और भारीपन
किडनी फेलियर की स्थिति में शरीर में मिनरल बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे मांसपेशियों में ऐंठन, दर्द और भारीपन महसूस होता है। खासकर रात के समय पैरों में खिंचाव या दर्द होना एक संकेत हो सकता है।

पैरों में सुन्नता या झनझनाहट
किडनी खराब होने पर शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, जो नसों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या जलन जैसी समस्या हो सकती है।

त्वचा में बदलाव और खुजली
अगर पैरों की त्वचा रूखी हो जाए, रंग बदलने लगे या लगातार खुजली हो, तो यह भी किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। टॉक्सिन्स के जमा होने से त्वचा पर इसका असर दिखने लगता है।

पैरों में घाव का देर से भरना
डायबिटीज और किडनी की समस्या अक्सर साथ-साथ चलती हैं। अगर पैरों में छोटे घाव या चोट देर से ठीक हो रही है, तो यह किडनी फंक्शन कमजोर होने की ओर इशारा कर सकता है।

इन लक्षणों के साथ दिख सकते हैं ये संकेत भी
पैरों के लक्षणों के साथ अगर बार-बार थकान, पेशाब में बदलाव, झागदार यूरिन, भूख कम लगना या सांस फूलना जैसी समस्याएं भी हों, तो सतर्क हो जाना चाहिए।

क्या करें?
अगर पैरों में दर्द, सूजन या ऊपर बताए गए लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी है। ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट से किडनी की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

निष्कर्ष
पैर हमारे शरीर का वजन उठाते हैं, लेकिन कभी-कभी वही किडनी की सेहत का आईना भी बन जाते हैं। सही समय पर पहचान और इलाज से किडनी फेलियर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए शरीर के इन छोटे संकेतों को गंभीरता से लेना ही समझदारी है।

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