डायबिटीज मरीजों को चावल खाने से क्या होता है? क्या यह लापरवाही पड़ सकती है भारी?


 डायबिटीज के मरीजों के लिए खानपान का विशेष महत्व होता है। खासतौर पर चावल को लेकर अक्सर भ्रम बना रहता है—क्या शुगर के मरीज चावल खा सकते हैं या नहीं? इस सवाल का जवाब सीधा “हां” या “नहीं” में नहीं है, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि चावल किस प्रकार का है, कितनी मात्रा में खाया जा रहा है और साथ में क्या खाया जा रहा है।

क्यों बढ़ सकता है शुगर लेवल?

सफेद चावल (White Rice) का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) अपेक्षाकृत ज्यादा होता है। इसका मतलब है कि यह जल्दी पचकर रक्त में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ा सकता है। यदि डायबिटीज मरीज ज्यादा मात्रा में या बार-बार सफेद चावल खाते हैं, तो ब्लड शुगर स्पाइक हो सकता है।

क्या पूरी तरह चावल छोड़ देना चाहिए?

विशेषज्ञों के अनुसार, चावल पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन मात्रा और प्रकार पर ध्यान देना जरूरी है।

बेहतर विकल्प कौन से हैं?

  • ब्राउन राइस: इसमें फाइबर अधिक होता है, जिससे शुगर धीरे-धीरे बढ़ती है।

  • बासमती चावल (सीमित मात्रा में): कुछ प्रकार का बासमती चावल तुलनात्मक रूप से कम GI वाला होता है।

  • मिलेट्स (ज्वार, बाजरा, रागी): ये डायबिटीज मरीजों के लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

कितना और कैसे खाएं?

  • चावल की मात्रा सीमित रखें (छोटी कटोरी)

  • चावल को दाल, हरी सब्जियों और प्रोटीन के साथ मिलाकर खाएं

  • रात के बजाय दिन में खाना बेहतर हो सकता है

  • खाने के बाद हल्की वॉक जरूर करें

किन मरीजों को अधिक सावधानी?

जिनका HbA1c स्तर लगातार अधिक रहता है या जिनकी शुगर जल्दी बढ़ जाती है, उन्हें डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेकर ही चावल का सेवन करना चाहिए।

निष्कर्ष

डायबिटीज में चावल पूरी तरह वर्जित नहीं है, लेकिन लापरवाही भारी पड़ सकती है। सही मात्रा, सही प्रकार और संतुलित आहार के साथ चावल का सेवन सुरक्षित हो सकता है। नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग और डॉक्टर की सलाह इस स्थिति में बेहद जरूरी है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ