सूत्रों के अनुसार, पुस्तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित होने से पहले ही इसके कुछ हिस्सों के सार्वजनिक डोमेन में आने की सूचना मिली थी। इस लीक को सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़ा संवेदनशील मामला माना जा रहा है, क्योंकि लेखक देश के पूर्व सेना प्रमुख रहे हैं और पुस्तक में उनके कार्यकाल से जुड़े महत्वपूर्ण अनुभव, निर्णय और घटनाओं का उल्लेख होने की संभावना है।
स्पेशल सेल ने प्रकाशक से यह स्पष्ट करने को कहा है कि पांडुलिपि तक किन-किन लोगों की पहुंच थी और सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या अपनाए गए थे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि लीक किस स्तर पर हुआ—क्या यह प्रिंटिंग चरण में हुआ, संपादन प्रक्रिया के दौरान या फिर किसी अन्य माध्यम से सामग्री बाहर आई।
बताया जा रहा है कि नोटिस के जरिए प्रकाशक से संबंधित दस्तावेज, आंतरिक संचार और वितरण से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस मामले में किसी प्रकार की साजिश या जानबूझकर गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने का प्रयास किया गया है।
हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है कि पुस्तक के कौन-से हिस्से लीक हुए हैं या उनमें क्या सामग्री शामिल थी। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से भी मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों में अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक फैसलों और संवेदनशील घटनाओं से जुड़ी जानकारियां होती हैं। ऐसे में लीक की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष और व्यापक होगी तथा तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले में कानूनी और सुरक्षा पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
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