प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजन यह दिखाते हैं कि कैसे एक समय हिंसा और नक्सलवाद से जुड़ा इलाका अब शांति, उत्सव और प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की नीतियों और स्थानीय लोगों की भागीदारी से बस्तर में सकारात्मक बदलाव साफ नजर आ रहा है।
गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी से बढ़ा आयोजन का महत्व
बस्तर पंडुम कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे। यह आयोजन आदिवासी संस्कृति, लोककला, परंपराओं और स्थानीय विरासत को मंच देने के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम में बस्तर की जनजातीय संस्कृति, नृत्य, संगीत और पारंपरिक रीति-रिवाजों की भव्य झलक देखने को मिली।
पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन न सिर्फ स्थानीय पहचान को मजबूत करते हैं, बल्कि युवाओं में आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के युवाओं को शिक्षा, रोजगार और विकास के समान अवसर मिलें, ताकि वे देश की प्रगति में पूरी भागीदारी निभा सकें।
माओवाद से विकास की ओर बस्तर
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में साफ किया कि बस्तर अब बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जहां पहले डर और अस्थिरता का माहौल था, अब वहां विकास परियोजनाएं, सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है।
पीएम मोदी के मुताबिक, बस्तर पंडुम सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि बस्तर की असली ताकत उसकी संस्कृति, लोग और आत्मविश्वास है। आने वाले समय में ऐसे आयोजन बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी के बयान से साफ है कि बस्तर अब हिंसा की नहीं, बल्कि उत्सव, विकास और उम्मीद की पहचान बनता जा रहा है।
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