अमेरिका की चर्चित एआई कंपनी Anthropic की भारत में संभावित एंट्री से पहले ही एक कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक के बेलगावी स्थित एक भारतीय कंपनी, Anthropic Software Private Limited ने नाम को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। स्टार्टअप का दावा है कि उसके नाम से मिलते-जुलते ब्रांड के साथ अमेरिकी कंपनी के भारत आने से भ्रम और कानूनी टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
मामला क्या है?
बेलगावी स्थित Anthropic Software Private Limited का कहना है कि उसने भारत में अपने नाम से कंपनी पंजीकृत कर रखी है और वह इस ब्रांड पहचान के साथ काम कर रही है। ऐसे में यदि अमेरिकी कंपनी Anthropic इसी नाम से भारत में कारोबार शुरू करती है, तो इससे ट्रेडमार्क विवाद और उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
भारतीय स्टार्टअप का तर्क है कि कंपनी अधिनियम और ट्रेडमार्क कानून के तहत पहले से पंजीकृत नाम की कानूनी सुरक्षा मिलती है। इसलिए किसी विदेशी कंपनी को समान या मिलते-जुलते नाम से संचालन की अनुमति देना स्थानीय व्यवसाय के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
कंपनी कानून का सहारा क्यों?
भारतीय कंपनी ने कंपनी कानून और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के प्रावधानों का हवाला देते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्पष्टता नहीं हुई तो ब्रांड वैल्यू, प्रतिष्ठा और व्यावसायिक हितों को नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में अदालत यह देखती है कि किस कंपनी ने पहले नाम का पंजीकरण कराया, किसके पास ट्रेडमार्क अधिकार हैं और किस स्तर पर व्यवसाय संचालित हो रहा है। यदि नाम में समानता से उपभोक्ताओं को भ्रम होने की आशंका साबित होती है, तो अदालत विदेशी कंपनी को नाम बदलने या संशोधित ब्रांडिंग के निर्देश दे सकती है।
आगे क्या?
अभी यह मामला प्रारंभिक चरण में है, लेकिन इससे यह स्पष्ट हो गया है कि भारत जैसे बड़े बाजार में प्रवेश से पहले कानूनी और ब्रांडिंग पहलुओं की गहन जांच जरूरी होती है।
यह विवाद न केवल एक नाम को लेकर है, बल्कि यह स्थानीय स्टार्टअप्स के अधिकारों और वैश्विक कंपनियों की रणनीति के बीच संतुलन का भी सवाल है। आने वाले दिनों में अदालत का रुख तय करेगा कि भारत में “Anthropic” नाम के साथ कौन आगे बढ़ पाएगा।
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