देश के प्रमुख सरकारी अस्पताल एम्स दिल्ली में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से मरीजों की जांच प्रक्रिया और तेज व सटीक हो गई है। छाती का एक्स-रे होने के तुरंत बाद उसकी पहली जांच अब एक एडवांस्ड AI सिस्टम करता है, जो कुछ ही सेकंड में इमेज को स्कैन कर संभावित संक्रमण, गांठ या अन्य असामान्यताओं की ओर संकेत दे देता है।
कैसे काम करता है यह AI सिस्टम?
यह तकनीक एक्स-रे इमेज को डिजिटल रूप से विश्लेषित करती है और पहले से प्रशिक्षित एल्गोरिदम के आधार पर असामान्य पैटर्न पहचानती है।
AI सिस्टम संभावित समस्या वाले हिस्से को हाईलाइट कर देता है, जिससे रेडियोलॉजिस्ट और डॉक्टर तेजी से निर्णय ले सकें।
समय और सटीकता दोनों में फायदा
पहले एक्स-रे रिपोर्ट तैयार होने में समय लग सकता था, खासकर मरीजों की अधिक संख्या होने पर। अब AI की मदद से शुरुआती स्क्रीनिंग सेकंडों में हो जाती है। इससे गंभीर मामलों की पहचान जल्दी हो पाती है और इलाज में देरी की संभावना कम होती है।
हालांकि अंतिम निर्णय डॉक्टर ही लेते हैं, लेकिन AI एक सहायक उपकरण के रूप में काम करता है और संभावित जोखिमों को पहले ही चिन्हित कर देता है।
किन बीमारियों की जल्दी पहचान?
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तपेदिक (टीबी)
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निमोनिया
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फेफड़ों का कैंसर (प्रारंभिक संकेत)
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कोविड या अन्य वायरल संक्रमण
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फेफड़ों में सूजन या फाइब्रोसिस
स्वास्थ्य सेवाओं में नई दिशा
एम्स दिल्ली की यह पहल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग का उदाहरण है। AI आधारित स्क्रीनिंग से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में तेजी से रोग पहचान संभव हो सकेगी, खासकर जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।
यह कदम दर्शाता है कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वास्थ्य क्षेत्र में एक मजबूत सहयोगी साबित होगा—जो इलाज को तेज, सटीक और अधिक सुलभ बनाएगा।
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