क्या है AI डेटा सिटी का विजन?
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डेटा एनालिटिक्स और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। प्रस्तावित एआई डेटा सिटी में अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स, रिसर्च लैब्स, स्टार्टअप इनक्यूबेशन हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि यह हब न केवल भारत की डिजिटल जरूरतों को पूरा करे, बल्कि वैश्विक कंपनियों को भी आकर्षित करे। परियोजना को अमेरिका और चीन जैसे देशों की एआई क्षमताओं को टक्कर देने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
किन कंपनियों की दिलचस्पी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई वैश्विक टेक दिग्गज और भारतीय आईटी कंपनियां इस परियोजना में निवेश की संभावनाएं तलाश रही हैं। क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स, चिप डिजाइन कंपनियां, एआई स्टार्टअप्स और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों की भागीदारी से यह इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो सकता है।
रोजगार और आर्थिक बढ़त
एआई डेटा सिटी से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। आईटी, साइबर सुरक्षा, डेटा साइंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में युवाओं को नए अवसर मिलेंगे। साथ ही, स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
रणनीतिक महत्व
भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल उपयोग, 5G विस्तार और सरकारी डिजिटल पहलों के चलते डेटा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विशाखापत्तनम में एआई डेटा सिटी का विकास देश को डेटा संप्रभुता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।
कुल मिलाकर, यह पहल विशाखापत्तनम को एक नए टेक्नोलॉजी पावरहाउस के रूप में स्थापित कर सकती है और भारत को वैश्विक एआई दौड़ में मजबूत स्थिति दिला सकती है।
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