अमेरिका में AI नीति पर टकराव: एंथ्रोपिक को बताया ‘सप्लाई-चेन रिस्क’, CEO बोले—धमकियों से नहीं बदलेंगे नियम


 अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एआई कंपनी Anthropic और अमेरिकी प्रशासन के बीच तनाव तब बढ़ा जब ‘डिपार्टमेंट ऑफ वॉर’ (रक्षा प्रतिष्ठान) से जुड़े शीर्ष अधिकारी Pete Hegseth ने कंपनी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “सप्लाई-चेन रिस्क” घोषित करने का निर्देश देने की बात कही।

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशासन चाहता है कि एंथ्रोपिक अपनी एआई तकनीक को रक्षा और सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए बिना किसी बड़े प्रतिबंध के उपलब्ध कराए। लेकिन कंपनी का कहना है कि उसने केवल दो विशेष अपवादों (exceptions) पर आपत्ति जताई है, जो उसके सुरक्षा और नैतिक मानकों से जुड़े हैं।

एंथ्रोपिक के सीईओ Dario Amodei ने इस विवाद पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि कंपनी अपने सुरक्षा सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगी। उनका कहना है कि एआई तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी और स्पष्ट दिशानिर्देशों के तहत ही होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी तरह की धमकी या दबाव के चलते कंपनी अपने नियमों में बदलाव नहीं करेगी।

क्या है विवाद की जड़?

अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में एआई कंपनियों का पूर्ण सहयोग आवश्यक है। यदि किसी कंपनी की तकनीक में सीमाएं या शर्तें हैं, तो वह रक्षा तैयारियों के लिए जोखिम बन सकती है। इसी आधार पर एंथ्रोपिक को सप्लाई-चेन रिस्क की श्रेणी में डालने की बात सामने आई।

दूसरी ओर, एंथ्रोपिक का कहना है कि उसकी आपत्तियां तकनीकी दुरुपयोग और सुरक्षा जोखिमों को लेकर हैं। कंपनी चाहती है कि एआई सिस्टम का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानकों और नैतिक ढांचे के भीतर ही किया जाए।

व्यापक असर

यह विवाद केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। इससे अमेरिका में एआई कंपनियों और सरकार के बीच रिश्तों की दिशा तय हो सकती है। सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कंपनियों से पूर्ण नियंत्रण की मांग की जाएगी, या फिर निजी कंपनियों को अपने सुरक्षा मानकों पर कायम रहने की स्वतंत्रता मिलेगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव भविष्य की एआई नीति और टेक उद्योग की स्वायत्तता पर गहरा असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों पक्ष समझौते की राह चुनते हैं या विवाद और गहराता है।

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