रूस से तेल आयात पर भारत को बड़ी राहत, अमेरिका ने हटाया 25% अतिरिक्त टैरिफ कब से लागू होगा फैसला?


 भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते अब एक नई दिशा में आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की अंतिम रूपरेखा पर सहमति बन चुकी है। इस समझौते के तहत भारत को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि अमेरिका ने रूस से तेल आयात को लेकर भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ हटा दिया है। इसके साथ ही भारत पर लगने वाला कुल टैरिफ भी 50 फीसदी से घटकर 18 फीसदी रह गया है।

क्या था रूस से तेल पर अतिरिक्त टैरिफ?

अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त रुख अपनाया था। इसी कड़ी में भारत पर रूस से कच्चा तेल आयात करने को लेकर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था। इससे भारतीय निर्यातकों और कुछ उद्योगों पर दबाव बढ़ गया था। अब इस टैरिफ को हटाने का फैसला भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत माना जा रहा है।

कब से मिलेगी भारत को राहत?

व्यापार समझौते से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह राहत तय डेडलाइन के अनुसार आज से या अगले कुछ कार्यदिवसों में औपचारिक रूप से लागू हो जाएगी। दोनों देशों के संबंधित विभागों द्वारा अधिसूचना जारी होते ही अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर घटा हुआ टैरिफ लागू माना जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों को तुरंत फायदा मिलने की उम्मीद है।

कुल टैरिफ 18 फीसदी होने का क्या मतलब?

अमेरिका द्वारा कुल टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने का मतलब है कि भारतीय सामान अब अमेरिकी बाजार में पहले से कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धी होंगे। खासतौर पर इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स और आईटी से जुड़े उत्पादों को सीधा लाभ मिलेगा।

भारत की अर्थव्यवस्था और आमजन पर असर

रूस से सस्ते कच्चे तेल का आयात जारी रहने से भारत को ऊर्जा सुरक्षा में मदद मिलेगी और ईंधन लागत पर नियंत्रण रहेगा। इसका अप्रत्यक्ष फायदा आम लोगों को महंगाई के मोर्चे पर राहत के रूप में मिल सकता है। वहीं, निर्यात बढ़ने से उद्योगों में उत्पादन और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरिम समझौता भारत-अमेरिका के बीच व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की ओर एक मजबूत कदम है। अगर आगे भी इसी तरह सहयोग बढ़ता रहा, तो दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं। कुल मिलाकर, यह डील भारत के लिए व्यापार, ऊर्जा और रोजगार—तीनों मोर्चों पर सकारात्मक संकेत देती है।

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