फुटबॉल के देश में बैट-बॉल की वापसी: कैसे इटली में जन्मा, दबा और फिर जिंदा हुआ क्रिकेट? 230 साल पुरानी कहानी

जब भी इटली का नाम आता है, दिमाग में सबसे पहले फुटबॉल, सेरी-A और आज़ूरी टीम की तस्वीर उभरती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसी फुटबॉल के देश में क्रिकेट की जड़ें करीब 230 साल पुरानी हैं। आज जब इटली ने पहली बार पुरुष क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया है, तो यह उपलब्धि अचानक नहीं बल्कि एक लंबी, संघर्षभरी और दिलचस्प यात्रा का नतीजा है।

18वीं सदी में रखा गया क्रिकेट का बीज

इटली में क्रिकेट का आगमन 18वीं सदी के अंत में हुआ, जब ब्रिटिश व्यापारी, नौसैनिक और राजनयिक देश के बंदरगाही शहरों—जैसे जेनोआ और नेपल्स—में पहुंचे। शुरुआती दौर में क्रिकेट अमीर तबके और विदेशी समुदाय तक सीमित रहा, लेकिन धीरे-धीरे यह खेल अपनी पहचान बनाने लगा।

मुसोलिनी शासन में लगभग खत्म हो गया क्रिकेट

हालांकि, इटली में क्रिकेट की यह यात्रा आसान नहीं रही। 1920 और 1930 के दशक में फासीवादी शासक बेनिटो मुसोलिनी के दौर में हालात पूरी तरह बदल गए। उस समय सरकार ने ऐसे खेलों को बढ़ावा दिया, जो “राष्ट्रीय पहचान” से जुड़े थे। फुटबॉल को राष्ट्रवाद का प्रतीक बना दिया गया और क्रिकेट जैसे विदेशी माने जाने वाले खेलों को हाशिए पर धकेल दिया गया। नतीजा यह हुआ कि क्रिकेट क्लब बंद होने लगे और यह खेल लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया।

1980 के बाद शुरू हुई नई जिंदगी

करीब आधी सदी के सन्नाटे के बाद 1980 के दशक में क्रिकेट ने इटली में दोबारा सांस ली। प्रवासी भारतीय, पाकिस्तानी, श्रीलंकाई और ब्रिटिश समुदाय ने क्रिकेट को फिर से जीवित करने में अहम भूमिका निभाई। छोटे-छोटे क्लब बने, घरेलू टूर्नामेंट शुरू हुए और धीरे-धीरे एक संरचना खड़ी हुई।

ICC मान्यता और प्रवासी खिलाड़ियों का योगदान

इटली को जब ICC की आधिकारिक मान्यता मिली, तो क्रिकेट को एक नई दिशा मिली। बेहतर संगठन, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भागीदारी और प्रवासी खिलाड़ियों की मेहनत ने टीम को मजबूती दी। इनमें कई खिलाड़ी ऐसे रहे, जिनकी जड़ें क्रिकेट खेलने वाले देशों से जुड़ी थीं, लेकिन उन्होंने इटली को अपना घर बनाया।

वर्ल्ड कप तक पहुंचना: मेहनत का इनाम

आज इटली का पहली बार पुरुष क्रिकेट वर्ल्ड कप में पहुंचना उस 230 साल पुरानी कहानी का सबसे सुनहरा अध्याय है। यह साबित करता है कि फुटबॉल के दबदबे वाले देश में भी क्रिकेट अपनी जगह बना सकता है—बस समय, धैर्य और जुनून चाहिए।

इटली की यह उपलब्धि न सिर्फ उसके क्रिकेट इतिहास के लिए अहम है, बल्कि दुनिया भर के उभरते क्रिकेट देशों के लिए भी प्रेरणा है कि दबा हुआ खेल भी सही मौके और मेहनत से फिर जिंदा हो सकता है।

 

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