बजट 2026 में हेल्थ सेक्टर को बड़ी राहत: ऑटोइम्यून दवाएं होंगी सस्ती, कैंसर-डायबिटीज मरीजों को भी फायदा


 केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने हेल्थ सेक्टर, खासकर बायोफार्मा क्षेत्र को लेकर बड़ा और राहत भरा ऐलान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों की दवाओं को सस्ता और आम लोगों की पहुंच में लाना है।

ऑटोइम्यून बीमारियों के मरीजों को बड़ी राहत
बजट 2026 की सबसे अहम घोषणाओं में ऑटोइम्यून बीमारियों की दवाओं को सस्ता करने का फैसला शामिल है। ऑटोइम्यून डिजीज में शरीर की इम्यून सिस्टम खुद के अंगों पर हमला करने लगती है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक महंगा इलाज कराना पड़ता है। सरकार के इस कदम से रूमेटॉयड आर्थराइटिस, ल्यूपस, सोरायसिस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

कैंसर और डायबिटीज की दवाओं पर भी फोकस
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निवेश सिर्फ ऑटोइम्यून बीमारियों तक सीमित नहीं रहेगा। कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर और तेजी से बढ़ती बीमारियों की दवाओं को भी किफायती बनाने पर जोर दिया जाएगा। इससे इलाज की लागत कम होगी और ज्यादा से ज्यादा मरीज समय पर उपचार ले सकेंगे।

बायोफार्मा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
बजट में बायोफार्मा रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन को मजबूत करने की बात कही गई है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी करे, बल्कि सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं के उत्पादन में वैश्विक केंद्र (Global Hub) के रूप में उभरे। इससे दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।

इलाज सस्ता, पहुंच आसान
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर बायोफार्मा सेक्टर में निवेश और घरेलू उत्पादन बढ़ता है, तो महंगी बायोलॉजिक दवाएं भी आम मरीजों के लिए सुलभ हो सकती हैं। इससे खासतौर पर उन लोगों को राहत मिलेगी, जिन्हें सालों तक लगातार दवाएं लेनी पड़ती हैं।

निष्कर्ष
Union Budget 2026 का यह फैसला हेल्थ सेक्टर के लिए एक मजबूत और सकारात्मक संकेत है। ऑटोइम्यून, कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों की दवाओं को सस्ता करने की पहल से लाखों मरीजों को आर्थिक और मानसिक राहत मिल सकती है। अगर इन घोषणाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह बजट आम आदमी की सेहत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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