एलएसी गतिरोध के बाद रिश्तों में सुधार, भारत-चीन व्यापार 155.6 अरब डॉलर तक पहुंचा


 चार साल से अधिक समय तक चले वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव के बाद अब भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। कूटनीतिक और व्यावहारिक स्तर पर उठाए गए कई सकारात्मक कदमों का असर दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 155.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए अहम माना जा रहा है।

एलएसी पर लंबे समय तक चले सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध के कारण भारत-चीन संबंधों में ठहराव आ गया था। इस दौरान न केवल राजनीतिक संवाद सीमित हुआ, बल्कि लोगों के आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा। हालांकि, बीते कुछ महीनों में दोनों देशों ने रिश्तों को सामान्य दिशा में लाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। इनमें सीधी उड़ानों को दोबारा शुरू करने की पहल, वीजा प्रतिबंधों में ढील और उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत को तेज करना शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया को मजबूती मिली है। खासतौर पर व्यापार के मोर्चे पर इसका असर तेजी से देखने को मिला है। चीन भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है, वहीं भारत भी चीनी बाजार के लिए एक अहम गंतव्य है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स और कच्चे माल जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है।

हालांकि, व्यापार में बढ़ोतरी के साथ कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। भारत लंबे समय से चीन के साथ व्यापार घाटे को लेकर चिंता जताता रहा है। इसके बावजूद, मौजूदा हालात में व्यापारिक गतिविधियों में आई तेजी को दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार और उद्योग जगत के स्तर पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में व्यापार को और संतुलित बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, भारत और चीन के बीच रिश्तों में यह सुधार चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा। सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे अभी भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं, लेकिन संवाद और सहयोग के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना रिश्तों को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

कुल मिलाकर, 155.6 अरब डॉलर तक पहुंचा भारत-चीन व्यापार यह संकेत देता है कि दोनों देश मतभेदों के बावजूद व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने के रास्ते पर हैं। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि यह सुधार कितनी मजबूती से आगे बढ़ता है और द्विपक्षीय संबंधों को किस दिशा में ले जाता है।

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