महिला के खाते से उड़ाए ₹11 लाख: e-SIM अपग्रेड के नाम पर कॉल, OTP शेयर करते ही खाली हुआ अकाउंट


 डिजिटल सुविधा के लिए लाई गई e-SIM तकनीक अब साइबर अपराधियों का नया हथियार बनती जा रही है। हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें एक महिला के बैंक खाते से करीब 11 लाख रुपये सिर्फ कुछ ही मिनटों में निकाल लिए गए। ठगों ने खुद को मोबाइल कंपनी का प्रतिनिधि बताकर e-SIM अपग्रेड का झांसा दिया और OTP हासिल कर वारदात को अंजाम दिया।

गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा पहल ‘साइबर दोस्त’ ने भी इस तरह के बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट जारी किया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

 कैसे हुआ e-SIM फ्रॉड?

  1. महिला को एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी का कर्मचारी बताया।

  2. कहा गया कि उनके नंबर को e-SIM में अपग्रेड किया जाना है और इसके लिए एक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

  3. कॉल के दौरान महिला से एक OTP साझा करने को कहा गया।

  4. OTP मिलते ही ठगों ने SIM स्वैपिंग (SIM Swapping) की प्रक्रिया पूरी कर ली।

  5. जैसे ही मोबाइल नेटवर्क बंद हुआ, अपराधियों ने बैंक खातों से जुड़े OTP अपने कब्जे में लेकर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए लाखों रुपये ट्रांसफर कर लिए

इस पूरी प्रक्रिया में कुछ ही मिनट लगे और पीड़िता का अकाउंट लगभग खाली हो गया।

 क्या है SIM Swapping या e-SIM फ्रॉड?

SIM Swapping एक ऐसी साइबर ठगी है, जिसमें अपराधी किसी व्यक्ति के मोबाइल नंबर को अपने नियंत्रण में ले लेते हैं।

  • जैसे ही नंबर अपराधियों के पास जाता है,

  • बैंक OTP, अलर्ट और वेरिफिकेशन कोड सीधे उनके फोन पर आने लगते हैं।

  • इसके बाद वे आसानी से नेट बैंकिंग, UPI या कार्ड ट्रांजैक्शन के जरिए पैसे निकाल लेते हैं।

e-SIM की सुविधा डिजिटल है, इसलिए इसमें भौतिक सिम बदलने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे ठगी और तेज हो जाती है।

 कैसे बचें इस फ्रॉड से?

 किसी भी अनजान कॉल पर OTP, PIN या बैंक डिटेल कभी साझा न करें।
 मोबाइल कंपनी कभी भी फोन पर OTP नहीं मांगती।
 अचानक नेटवर्क चला जाए या सिम बंद हो जाए तो तुरंत अपने सेवा प्रदाता से संपर्क करें।
 बैंक खाते में संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
 अपने मोबाइल नंबर पर SIM लॉक या अतिरिक्त सुरक्षा फीचर सक्रिय रखें।

 सतर्कता ही सुरक्षा

साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। e-SIM जैसी आधुनिक तकनीक भी अब ठगी का जरिया बन रही है। ऐसे में डिजिटल लेन-देन करते समय अतिरिक्त सावधानी बेहद जरूरी है।

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