क्या 10 साल से कम उम्र के बच्चों को भी हो सकता है हार्ट अटैक? डॉक्टर से जानिए


 हार्ट अटैक को आमतौर पर बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में युवाओं और यहां तक कि बच्चों में भी हृदय संबंधी समस्याओं के मामले सामने आए हैं। ऐसे में सवाल उठता है—क्या 10 साल से कम उम्र के बच्चों को भी हार्ट अटैक हो सकता है?

क्या बच्चों में हार्ट अटैक संभव है?

डॉक्टरों के अनुसार, 10 साल से कम उम्र के बच्चों में पारंपरिक हार्ट अटैक (कोरोनरी आर्टरी ब्लॉकेज के कारण) बेहद दुर्लभ होता है। बच्चों में दिल का दौरा आमतौर पर वयस्कों की तरह लाइफस्टाइल कारणों से नहीं, बल्कि जन्मजात (कॉनजेनिटल) हृदय रोग, गंभीर संक्रमण, सूजन या दुर्लभ जेनेटिक स्थितियों की वजह से हो सकता है।

जेनेटिक फैक्टर की भूमिका

यदि परिवार में कम उम्र में हृदय रोग, हाई कोलेस्ट्रॉल या अचानक कार्डियक अरेस्ट का इतिहास रहा हो, तो बच्चों में भी जोखिम बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी होती है।

किन लक्षणों पर ध्यान दें?

बच्चों में हृदय संबंधी समस्या के संकेत अलग हो सकते हैं, जैसे—

  • सीने में दर्द या दबाव

  • अचानक बेहोशी

  • तेज धड़कन या सांस लेने में तकलीफ

  • खेलते समय जल्दी थक जाना

  • होंठ या त्वचा का नीला पड़ना (कुछ जन्मजात रोगों में)

इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।

किन कारणों से बढ़ रहा जोखिम?

आजकल मोटापा, जंक फूड, शारीरिक गतिविधि की कमी और स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं कम उम्र में ही देखी जा रही हैं। हालांकि यह सीधे हार्ट अटैक का कारण कम ही बनता है, लेकिन भविष्य में हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है।

बचाव के उपाय

  • संतुलित और पौष्टिक आहार

  • नियमित शारीरिक गतिविधि

  • स्क्रीन टाइम सीमित करना

  • पारिवारिक इतिहास होने पर समय-समय पर हेल्थ चेकअप

निष्कर्षतः, 10 साल से कम उम्र के बच्चों में हार्ट अटैक बहुत दुर्लभ है, लेकिन पूरी तरह असंभव नहीं। यदि परिवार में हृदय रोग का इतिहास है या बच्चे में असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है। समय पर पहचान और उपचार से गंभीर जोखिम को टाला जा सकता है।

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