अब तक जब कोई कंपनी अपने शेयरों का बायबैक करती थी, तो उससे मिलने वाली रकम को डिविडेंड इनकम की तरह माना जाता था। यानी कंपनी पर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) लागू होता था और निवेशक को अलग से टैक्स की चिंता कम रहती थी। लेकिन 1 अप्रैल 2026 से यह व्यवस्था बदल जाएगी। नए नियमों के तहत शेयर बायबैक से होने वाली कमाई को कैपिटल गेन माना जाएगा और उसी के हिसाब से निवेशकों को टैक्स देना होगा।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन निवेशकों पर पड़ेगा, जो बायबैक के जरिए शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म मुनाफा कमाते हैं। अब शेयर कितने समय तक होल्ड किए गए हैं, उसके आधार पर टैक्स तय होगा। अगर शेयर कम समय के लिए रखे गए हैं, तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा, जबकि लंबे समय तक रखे गए शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। इससे कुछ मामलों में टैक्स बोझ पहले के मुकाबले बढ़ सकता है।
टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बदलाव का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाना और अलग-अलग इनकम सोर्स पर एक समान नियम लागू करना है। हालांकि, इससे निवेशकों को अब पहले से ज्यादा सतर्क रहना होगा और किसी भी बायबैक ऑफर में हिस्सा लेने से पहले टैक्स कैलकुलेशन जरूर करनी होगी।
इसके अलावा, इस बदलाव का असर हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) और बड़े निवेशकों पर ज्यादा देखने को मिल सकता है, क्योंकि उनकी कैपिटल गेन इनकम ज्यादा होती है। रिटेल निवेशकों के लिए भी यह जरूरी हो जाएगा कि वे टैक्स प्लानिंग को अपनी निवेश रणनीति का हिस्सा बनाएं।
निष्कर्ष:
1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए टैक्स नियम निवेशकों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं। शेयर बायबैक से कमाई करने वालों को अब डिविडेंड नहीं, बल्कि कैपिटल गेन टैक्स के नजरिए से सोचने की जरूरत होगी। ऐसे में बेहतर होगा कि समय रहते टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लेकर अपनी निवेश योजना को अपडेट किया जाए, ताकि मुनाफा भी बना रहे और टैक्स का बोझ भी संतुलित रहे।
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