Union Budget 2026: टैरिफ जंग और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मोदी सरकार का आक्रामक सुधार एजेंडा


 वैश्विक स्तर पर बढ़ती टैरिफ जंग, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच पेश होने वाला केंद्रीय बजट 2026 मोदी सरकार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यह बजट न सिर्फ मौजूदा आर्थिक चुनौतियों का जवाब होगा, बल्कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सरकार की रणनीति को भी स्पष्ट करेगा। जानकारों का मानना है कि इस बार का बजट सुधारों पर केंद्रित और विकास को नई रफ्तार देने वाला हो सकता है।

अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली के अनुसार, यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के तुरंत बाद आने वाला यह बजट भारत के लिए एक बड़े अवसर की तरह है। उनका कहना है कि सरकार ऐसे समय में बजट पेश कर रही है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था सुस्ती और अनिश्चितता से जूझ रही है। ऐसे में भारत को अपनी आंतरिक मजबूती, निवेश और उत्पादन क्षमता को और मजबूत करना होगा।

डॉ. कोहली का मानना है कि बजट 2026 में संरचनात्मक सुधारों पर खास जोर देखने को मिल सकता है। इनमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा, निर्यात प्रोत्साहन, स्टार्टअप्स के लिए बेहतर माहौल और एमएसएमई सेक्टर को सशक्त बनाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल अर्थव्यवस्था और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है।

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मौजूदा जीडीपी ग्रोथ रेट को बनाए रखने के साथ उसे और तेज करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव और टैरिफ विवादों के बावजूद भारत की घरेलू खपत मजबूत बनी हुई है। बजट में यदि टैक्स सुधार, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर फोकस किया जाता है, तो विकास की गति को और स्थिर किया जा सकता है।

इसके अलावा, बजट 2026 में राजकोषीय अनुशासन और सामाजिक कल्याण योजनाओं के बीच संतुलन साधना भी सरकार के लिए अहम होगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ाकर सरकार लंबे समय में मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा सकती है।

कुल मिलाकर, टैरिफ संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में पेश होने वाला यूनियन बजट 2026 मोदी सरकार के आर्थिक विजन की अग्निपरीक्षा होगा। यदि बजट में सुधारों और विकास के बीच सही संतुलन बना, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के साथ 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को और करीब ला सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ