Touchscreen से तौबा: कारों में फिर लौटेंगे बटन वाले सिस्टम, जानिए क्यों बढ़ रही है यह सोच


 पिछले कुछ सालों में कारों के डैशबोर्ड पर लगी बड़ी-बड़ी टचस्क्रीन हाई-टेक और लग्ज़री की पहचान बन गई थीं। म्यूजिक कंट्रोल से लेकर एसी, नेविगेशन और यहां तक कि ड्राइव मोड तक—सब कुछ एक स्क्रीन में समेट दिया गया। लेकिन अब ऑटो इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव होता दिख रहा है। कारों से टचस्क्रीन की छुट्टी और फिजिकल बटन की वापसी की चर्चा तेज हो गई है, और इसकी वजह है—ड्राइवर की सुरक्षा

हालिया रिसर्च और सेफ्टी स्टडीज़ के मुताबिक, ड्राइविंग के दौरान टचस्क्रीन का इस्तेमाल मोबाइल फोन चलाने जितना ही खतरनाक साबित हो सकता है। टचस्क्रीन पर किसी फीचर को बदलने के लिए ड्राइवर को बार-बार नजरें सड़क से हटानी पड़ती हैं। इसके अलावा, स्क्रीन पर कोई फिजिकल फीडबैक नहीं होता, जिससे ड्राइवर को सही विकल्प चुनने के लिए ध्यान केंद्रित करना पड़ता है। यही कुछ सेकंड का ध्यान भटकना हादसों की वजह बन सकता है।

इसके उलट, फिजिकल बटन और नॉब्स ड्राइवर को टच के जरिए फीडबैक देते हैं। अनुभवी ड्राइवर बिना देखे ही एसी या वॉल्यूम जैसे कंट्रोल्स इस्तेमाल कर लेते हैं। इससे सड़क पर फोकस बना रहता है। इसी कारण कई सड़क सुरक्षा एजेंसियां और ऑटो एक्सपर्ट्स अब बटन वाले सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं।

यूरोप और अन्य देशों में किए गए परीक्षणों में यह भी सामने आया है कि टचस्क्रीन वाले कार इंटरफेस में ड्राइवर का रिएक्शन टाइम बढ़ जाता है। कुछ मामलों में तो यह देरी टेक्स्टिंग ड्राइविंग से भी ज्यादा पाई गई। इन नतीजों के बाद कई कार निर्माता अपनी डिजाइन रणनीति पर दोबारा विचार कर रहे हैं।

अब कई बड़ी ऑटो कंपनियां यह संकेत दे चुकी हैं कि वे हाइब्रिड अप्रोच अपनाएंगी—जहां जरूरी और अक्सर इस्तेमाल होने वाले फंक्शन जैसे एसी, हेज़र्ड लाइट, डिफॉगर और वॉल्यूम के लिए फिजिकल बटन होंगे, जबकि नेविगेशन और इंफोटेनमेंट के लिए टचस्क्रीन का सीमित उपयोग किया जाएगा। इससे टेक्नोलॉजी और सेफ्टी के बीच संतुलन बनेगा।

ग्राहकों की प्रतिक्रिया भी इस बदलाव के पक्ष में जा रही है। कई यूजर्स का कहना है कि टचस्क्रीन आकर्षक तो लगती है, लेकिन रोजमर्रा की ड्राइविंग में यह झुंझलाहट और खतरा दोनों बढ़ाती है। खराब सड़कों या तेज रफ्तार में स्क्रीन को सही से ऑपरेट करना और भी मुश्किल हो जाता है।

कुल मिलाकर, ऑटो इंडस्ट्री अब यह समझने लगी है कि हर हाई-टेक चीज जरूरी नहीं कि सुरक्षित भी हो। ड्राइवर की सुरक्षा सर्वोपरि है, और इसी सोच के साथ कारों में एक बार फिर बटन वाले सिस्टम की वापसी हो रही है। आने वाले समय में कारें न सिर्फ स्मार्ट होंगी, बल्कि पहले से ज्यादा सुरक्षित भी।

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