Satellites: अब अंतरिक्ष में भी ट्रैफिक जाम! सैटेलाइट बने सिरदर्द, बचने के लिए एलन मस्क बना रहे ‘दूसरा रास्ता’


 धरती पर ट्रैफिक जाम आम बात है, लेकिन अब अंतरिक्ष में भी कुछ ऐसा ही हाल होता जा रहा है। हजारों सैटेलाइट्स पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में घूम रहे हैं, जिससे टकराव और अंतरिक्ष कचरे का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि साल 2026 में स्टारलिंक के हजारों सैटेलाइट्स की कक्षा को नीचे किया जाएगा, ताकि अंतरिक्ष को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके।

फिलहाल स्टारलिंक के सैटेलाइट्स पृथ्वी से करीब 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित कक्षा में काम कर रहे हैं। इंटरनेट सेवा के विस्तार के लिए स्पेसएक्स लगातार नए सैटेलाइट्स लॉन्च कर रही है, लेकिन इसके साथ ही स्पेस ट्रैफिक भी तेजी से बढ़ा है। नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि अगर सैटेलाइट्स की संख्या यूं ही बढ़ती रही, तो टकराव की घटनाएं आम हो सकती हैं।

स्पेसएक्स की नई योजना के तहत 2026 से स्टारलिंक सैटेलाइट्स को और नीचे की कक्षा में लाया जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अगर कोई सैटेलाइट खराब हो जाता है, तो वह अपेक्षाकृत जल्दी पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जलकर खत्म हो जाएगा। इससे अंतरिक्ष में लंबे समय तक घूमने वाला खतरनाक मलबा (Space Debris) कम होगा।

अंतरिक्ष विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में लो अर्थ ऑर्बिट में 8,000 से ज्यादा सक्रिय सैटेलाइट्स हैं, जिनमें बड़ी संख्या स्टारलिंक की है। इसके अलावा पुराने और निष्क्रिय सैटेलाइट्स के टुकड़े भी मौजूद हैं, जो बेहद तेज गति से घूमते हैं। ऐसे में एक छोटी सी टक्कर भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है, जिसे ‘केसलर सिंड्रोम’ कहा जाता है।

एलन मस्क की यह पहल इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि भविष्य में न सिर्फ इंटरनेट, बल्कि नेविगेशन, मौसम पूर्वानुमान, रक्षा और संचार के लिए सैटेलाइट्स की जरूरत और बढ़ने वाली है। अगर अभी से ट्रैफिक को नियंत्रित नहीं किया गया, तो अंतरिक्ष में काम करना मुश्किल हो सकता है।

हालांकि, स्पेसएक्स अकेली कंपनी नहीं है जो इस समस्या से जूझ रही है। अमेज़न का प्रोजेक्ट क्यूपर और चीन व यूरोप की कई योजनाएं भी हजारों सैटेलाइट्स लॉन्च करने की तैयारी में हैं। ऐसे में एलन मस्क का यह कदम अंतरिक्ष ट्रैफिक मैनेजमेंट की दिशा में एक मिसाल बन सकता है।

कुल मिलाकर, जिस तरह सड़कों पर फ्लाईओवर और वैकल्पिक रास्ते बनाए जाते हैं, उसी तरह अब अंतरिक्ष में भी ‘दूसरा रास्ता’ तलाशा जा रहा है। स्टारलिंक की कक्षा नीचे करने का फैसला भविष्य के लिए अंतरिक्ष को सुरक्षित रखने की एक अहम कोशिश माना जा रहा है।

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