गणतंत्र दिवस 2026 की परेड इस बार सैन्य शक्ति और संयुक्त अभियानों की ऐतिहासिक सफलता को खास तौर पर उजागर करने वाली है। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में पहली बार सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) की झांकी में भारत की अत्याधुनिक S-400 वायु रक्षा प्रणाली को प्रदर्शित किया जाएगा। यह सिस्टम
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है।
चौथी बार लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार करेंगे नेतृत्व
इस साल की गणतंत्र दिवस परेड का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार करेंगे। यह चौथी बार होगा जब वह परेड की कमान संभालेंगे। परेड में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के कुल 6,050 सैन्य कर्मी हिस्सा लेंगे, जो भारत की सैन्य एकता और अनुशासन का शानदार प्रदर्शन करेंगे।
पहली बार झांकी में दिखेगा S-400
एयर कमोडोर मनीष सबरवाल के अनुसार, S-400 वायु रक्षा प्रणाली को परेड में शामिल करने का फैसला इसकी रणनीतिक सफलता के कारण लिया गया है। उन्होंने बताया कि चार दिनों तक चले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने पाकिस्तान के 5–6 लड़ाकू विमानों और एक जासूसी विमान को मार गिराने में अहम भूमिका निभाई थी। इस प्रणाली ने देश की वायु सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य साबित किया।
ऑपरेशन सिंदूर: तीनों सेनाओं की संयुक्त सफलता
इस वर्ष की झांकी का मुख्य विषय ऑपरेशन सिंदूर के दौरान थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतरीन तालमेल और संयुक्त रणनीति होगी। यह झांकी भारत की “Jointness” और “Integrated Warfare” की अवधारणा को दर्शाएगी, जो भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
सैन्य ताकत और आत्मनिर्भर भारत का संदेश
गणतंत्र दिवस 2026 की परेड न सिर्फ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन होगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि भारत अपनी रक्षा क्षमताओं के मामले में पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और आत्मनिर्भर हो चुका है। S-400 की मौजूदगी देश की रणनीतिक तैयारी और दुश्मनों के लिए साफ चेतावनी मानी जा रही है।
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