भारतीय स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा इस समय बैक यानी डिस्क इंजरी से उबरने की प्रक्रिया में हैं। उनकी यह चोट न सिर्फ खेल प्रेमियों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि आम लोगों के लिए भी यह जानना जरूरी है कि आखिर डिस्क इंजरी होती क्या है, कितनी खतरनाक है और इससे ठीक होने में कितना वक्त लगता है।
क्या होती है डिस्क इंजरी?
हमारी रीढ़ की हड्डी (Spine) में हड्डियों के बीच डिस्क होती है, जो शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करती है। जब यह डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है या दब जाती है, तो इसे डिस्क इंजरी या स्लिप डिस्क कहा जाता है।
खिलाड़ियों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है क्योंकि लगातार झुकने, जोर लगाने और अचानक मूवमेंट से रीढ़ पर भारी दबाव पड़ता है।
नीरज चोपड़ा जैसे एथलीट्स के लिए क्यों खतरनाक?
जैवलिन थ्रो में कमर, पीठ और कंधों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
डिस्क इंजरी होने पर:
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तेज दर्द
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पैरों या हाथों में झनझनाहट
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मसल वीकनेस
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मूवमेंट में रुकावट
जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर समय पर सही इलाज और आराम न मिले, तो यह चोट करियर को लंबा ब्रेक लेने पर मजबूर कर सकती है।
डिस्क इंजरी से उबरने में कितना समय लगता है?
डिस्क इंजरी की गंभीरता पर रिकवरी निर्भर करती है:
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हल्की चोट: 4 से 6 हफ्ते
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मध्यम चोट: 2 से 3 महीने
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गंभीर स्थिति / सर्जरी की जरूरत: 6 महीने या उससे ज्यादा
नीरज चोपड़ा जैसे प्रोफेशनल एथलीट्स के लिए रिकवरी ज्यादा सावधानी से की जाती है ताकि दोबारा चोट न लगे।
बैक इंजरी से रिकवरी में क्या जरूरी होता है?
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पूरा आराम और सही फिजियोथेरेपी
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कोर स्ट्रेंथ एक्सरसाइज
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सही पोस्टर और मूवमेंट ट्रेनिंग
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जल्दबाजी में मैदान पर वापसी से बचना
आम लोगों को क्या सीख लेनी चाहिए?
डिस्क इंजरी सिर्फ खिलाड़ियों की समस्या नहीं है। गलत बैठने का तरीका, ज्यादा देर तक मोबाइल या लैपटॉप पर झुककर काम करना, वजन उठाने की गलत तकनीक – ये सब इसकी वजह बन सकते हैं।
निष्कर्ष
नीरज चोपड़ा की यह इंजरी भले ही चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन सही रिहैबिलिटेशन और धैर्य के साथ ‘गोल्डन बॉय’ की दमदार वापसी संभव है।
साथ ही यह हमें भी सिखाती है कि पीठ के दर्द को हल्के में न लें, क्योंकि सही समय पर इलाज ही लंबे नुकसान से बचा सकता है।
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