जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों का अभियान तेज हो गया है।
किश्तवाड़ जिले में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच
मुठभेड़ हुई है। यह कार्रवाई
ऑपरेशन त्राशी-I के तहत की जा रही है, जिसके बाद पूरे इलाके में
सघन सर्च ऑपरेशन जारी है। सुरक्षाबलों ने इलाके को घेरकर आतंकियों की तलाश और नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
क्या है ऑपरेशन त्राशी-I?
ऑपरेशन त्राशी-I एक खुफिया-आधारित आतंक-रोधी अभियान है, जिसका मकसद दुर्गम इलाकों में छिपे आतंकियों को ढूंढकर उनका सफाया करना है।
इस ऑपरेशन के तहत
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स्थानीय और तकनीकी इनपुट के आधार पर इलाके की घेराबंदी,
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ग्रिड सर्च,
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और संदिग्ध मूवमेंट पर कड़ी निगरानी
जैसे कदम उठाए जाते हैं। किश्तवाड़ जैसे पहाड़ी और जंगल वाले क्षेत्रों में यह रणनीति बेहद अहम मानी जाती है।
किश्तवाड़ क्यों बना फोकस?
किश्तवाड़ जिला भौगोलिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। यहां
मुठभेड़ के बाद बढ़ाई गई सतर्कता
मुठभेड़ के बाद पूरे इलाके में
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अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती,
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ड्रोन और टेक्निकल सर्विलांस,
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और आसपास के गांवों में तलाशी
जैसे कदम उठाए गए हैं। सुरक्षाबलों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी आतंकी भाग न सके और पूरा नेटवर्क ध्वस्त किया जा सके।
आतंक के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
सुरक्षा एजेंसियां साफ कर चुकी हैं कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। ऑपरेशन त्राशी-I इसी रणनीति का हिस्सा है, जहां
निष्कर्ष
किश्तवाड़ में चल रहा ऑपरेशन त्राशी-I यह साफ संकेत देता है कि सुरक्षाबल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ पूरी तरह सतर्क और आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। मुठभेड़ के बाद जारी सर्च ऑपरेशन से उम्मीद की जा रही है कि इलाके में सुरक्षा स्थिति और मजबूत होगी और आतंकियों की साजिशों पर करारा प्रहार होगा।
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