अपने संबोधन में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने वैश्विक उदाहरणों का जिक्र करते हुए वेनेजुएला और इराक का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि ये दोनों देश प्राकृतिक संसाधनों और आर्थिक क्षमता के बावजूद अपनी संप्रभुता और स्थिरता को पूरी तरह सुरक्षित नहीं रख पाए। इसका मुख्य कारण यह रहा कि वहां सैन्य शक्ति या तो पर्याप्त नहीं थी या फिर उसका इस्तेमाल करने की राजनीतिक और रणनीतिक इच्छाशक्ति की कमी दिखाई दी।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि किसी भी देश के लिए आर्थिक विकास बेहद जरूरी है, क्योंकि उससे संसाधन, तकनीक और बुनियादी ढांचा मजबूत होता है। लेकिन अगर इन संसाधनों की रक्षा करने के लिए सैन्य शक्ति सक्षम नहीं है, तो आर्थिक ताकत भी कमजोर साबित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इतिहास गवाह है कि संकट के समय वही देश टिके रहते हैं, जिनके पास मजबूत सेना और निर्णायक नेतृत्व होता है।
एपी सिंह ने यह भी कहा कि आधुनिक दौर में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साइबर वॉर, स्पेस डोमेन और एडवांस एयर पावर आज राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में भारतीय वायुसेना लगातार अपनी क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर काम कर रही है, ताकि किसी भी चुनौती का जवाब तुरंत और प्रभावी तरीके से दिया जा सके।
अपने भाषण में उन्होंने युवाओं और नीति-निर्माताओं से भी अपील की कि राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल रक्षा बजट या हथियारों की संख्या तक सीमित न समझें। असली ताकत उस मानसिकता में है, जो जरूरत पड़ने पर कठिन फैसले लेने से नहीं हिचकती। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए भी ताकत दिखाना जरूरी होता है, क्योंकि मजबूत रक्षा व्यवस्था ही किसी भी आक्रामक सोच को रोकने का सबसे प्रभावी जरिया है।
कुल मिलाकर, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का यह बयान मौजूदा वैश्विक हालात के बीच एक अहम चेतावनी और संदेश के रूप में देखा जा रहा है—आर्थिक प्रगति जरूरी है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मजबूत सैन्य शक्ति और उसे इस्तेमाल करने का संकल्प उससे भी ज्यादा अहम है।
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