Health Alert: मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों पर लगेगा ब्रेक? WHO ने बताया असरदार समाधान


 जी से बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण दुनिया भर में नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (NCDs) यानी गैर-संचारी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इनमें मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग और लिवर से जुड़ी बीमारियां प्रमुख हैं। इस गंभीर चुनौती को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक ठोस और व्यावहारिक समाधान सुझाया है, जिससे इन बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम किया जा सकता है।

WHO के मुताबिक, शुगर युक्त ड्रिंक्स (मीठे पेय पदार्थ) और अल्कोहल के अत्यधिक सेवन से डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग और फैटी लिवर जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में इन उत्पादों पर ज्यादा टैक्स लगाने से न सिर्फ इनका उपभोग कम होगा, बल्कि लोगों को ज्यादा स्वस्थ विकल्प अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जा सकेगा। WHO का मानना है कि टैक्स बढ़ाने से सरकारों को अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा, जिसे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

WHO की रिपोर्ट में कहा गया है कि मीठे ड्रिंक्स में मौजूद अतिरिक्त शुगर सीधे तौर पर मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनती है। वहीं, अल्कोहल का अधिक सेवन लिवर की बीमारियों के साथ-साथ हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ाता है। यदि इन उत्पादों की कीमत बढ़ाई जाती है, तो खासकर युवा वर्ग और कम आय वाले लोग इनके सेवन से दूरी बना सकते हैं।

इसके साथ ही WHO ने सिर्फ सरकारी नीतियों पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जीवनशैली में बदलाव पर भी जोर दिया है। संगठन का कहना है कि अगर लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे लेकिन स्थायी बदलाव करें, तो इन जानलेवा बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है। उदाहरण के तौर पर संतुलित आहार अपनाना, नियमित व्यायाम करना, मीठे और जंक फूड का सेवन कम करना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना बेहद असरदार कदम साबित हो सकते हैं।

WHO के अनुसार, दिन में कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि, फल-सब्जियों से भरपूर डाइट और तनाव को नियंत्रित करना हृदय और शुगर से जुड़ी बीमारियों के खतरे को काफी कम कर सकता है। साथ ही समय-समय पर हेल्थ चेक-अप करवाना भी जरूरी है, ताकि बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में ही हो सके।

कुल मिलाकर, WHO का यह प्लान साफ संकेत देता है कि सरकारी नीतियां और व्यक्तिगत जिम्मेदारी, दोनों मिलकर ही मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों पर प्रभावी ब्रेक लगा सकते हैं। अगर समय रहते इन सुझावों पर अमल किया गया, तो भविष्य में स्वास्थ्य से जुड़ा बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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