Gates Foundation: दुनिया की सबसे बड़ी परोपकारी संस्था ‘गेट्स फाउंडेशन’ होगी बंद, 2045 होगा आखिरी साल


 दुनिया की सबसे प्रभावशाली और बड़ी परोपकारी संस्थाओं में शुमार गेट्स फाउंडेशन को लेकर एक बड़ा ऐलान सामने आया है। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक और अरबपति कारोबारी बिल गेट्स ने संकेत दिया है कि उनकी मशहूर परोपकारी संस्था को धीरे-धीरे बंद करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस योजना के तहत गेट्स फाउंडेशन का अंतिम वर्ष 2045 होगा। यह फैसला वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य, शिक्षा और गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

बिल गेट्स ने स्पष्ट किया है कि फाउंडेशन को बंद करने का मतलब इसके काम को सीमित करना नहीं है, बल्कि अगले दो दशकों में इसके मिशन को और आक्रामक तरीके से पूरा करना है। इसी रणनीति के तहत गेट्स फाउंडेशन ने 2026 के लिए रिकॉर्ड 9 अरब डॉलर का बजट तय किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक खर्च होगा। यह बजट खासतौर पर वैश्विक स्वास्थ्य, वैक्सीन विकास, संक्रामक रोगों की रोकथाम, शिक्षा सुधार और जलवायु से जुड़े कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा।

गेट्स फाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2000 में बिल और मेलिंडा गेट्स ने की थी। तब से यह संस्था दुनिया के सबसे गरीब और कमजोर वर्गों के लिए काम कर रही है। पोलियो उन्मूलन, मलेरिया और टीबी जैसी बीमारियों से लड़ाई, कोविड-19 के दौरान वैक्सीन सपोर्ट और अफ्रीकी देशों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में इस संस्था की भूमिका बेहद अहम रही है।

बिल गेट्स का मानना है कि परोपकार का असली मकसद यह नहीं होना चाहिए कि कोई संस्था हमेशा के लिए चलती रहे, बल्कि यह होना चाहिए कि सीमित समय में अधिकतम प्रभाव डाला जाए। इसी सोच के तहत उन्होंने फैसला लिया है कि गेट्स फाउंडेशन अपनी सारी संपत्ति और संसाधनों को 2045 तक पूरी तरह जनकल्याण में लगा देगा और उसके बाद संस्था को औपचारिक रूप से बंद कर दिया जाएगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह फैसला परोपकार की दुनिया में एक नया मॉडल पेश करता है, जिसे “स्पेंड-डाउन अप्रोच” कहा जाता है। यानी फंड को धीरे-धीरे खर्च कर समाज में ठोस और मापने योग्य बदलाव लाना, बजाय इसके कि पूंजी को लंबे समय तक संरक्षित रखा जाए।

कुल मिलाकर, गेट्स फाउंडेशन का बंद होना भले ही एक युग के अंत का संकेत हो, लेकिन 2045 तक इसके जरिए होने वाला काम करोड़ों लोगों की जिंदगी पर स्थायी असर छोड़ सकता है। बिल गेट्स का यह कदम दिखाता है कि परोपकार सिर्फ दान नहीं, बल्कि दूरदर्शी रणनीति और ठोस परिणामों का नाम है।

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