उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ साझा मूल्यों, लोकतंत्र और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि यह व्यापार समझौता दोनों पक्षों के बीच विश्वास, सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। उनके मुताबिक, यह डील भविष्य में निवेश, तकनीक और इनोवेशन के लिए बड़े रास्ते खोलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस ऐतिहासिक समझौते को भारत और यूरोपीय संघ दोनों के लिए “गेम-चेंजर” बताया। उन्होंने कहा कि भारत-EU FTA दुनिया की सबसे बड़ी व्यापारिक डील्स में से एक है। पीएम मोदी के अनुसार, यह समझौता वैश्विक जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है। यह आंकड़े इस डील के वैश्विक प्रभाव को साफ तौर पर दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समझौते से भारतीय किसानों, एमएसएमई सेक्टर, स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को सीधे फायदा होगा। भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी, वहीं यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत निवेश का एक भरोसेमंद और तेजी से बढ़ता हुआ केंद्र बनेगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।
भारत-EU FTA केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। इसमें डिजिटल टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, जलवायु परिवर्तन, इनोवेशन और रणनीतिक सहयोग जैसे अहम क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक साझेदारी का उदाहरण बनेगा।
कुल मिलाकर, ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का यह ऐलान सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन के शब्दों में, “ये तो बस शुरुआत है”—और आने वाले वर्षों में इसके असर वैश्विक मंच पर साफ दिखाई देंगे।
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