गर्भावस्था महिलाओं के शरीर में कई बदलाव लाती है, जिनमें शुगर या ग्लूकोज लेवल का बढ़ना भी शामिल हो सकता है। इसे गैस्ट्रेशनल डायबिटीज (Gestational Diabetes) कहा जाता है। हाल के अध्ययनों में यह पाया गया है कि हर 7 में से 1 महिला को गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज का खतरा होता है। यही वजह है कि डॉक्टर अब पहली एंटीनैटल विजिट में ही डायबिटीज स्क्रीनिंग करने की सलाह दे रहे हैं।
गैस्ट्रेशनल डायबिटीज क्या है?
गैस्ट्रेशनल डायबिटीज वह स्थिति है जब गर्भावस्था के दौरान शरीर का इंसुलिन सही तरीके से काम नहीं करता और ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। यह न केवल मां के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करता है, बल्कि बच्चे के विकास पर भी असर डाल सकता है।
क्यों जरूरी है पहली विजिट में स्क्रीनिंग?
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जल्दी पहचान और इलाज: यदि डायबिटीज शुरुआती चरण में पकड़ ली जाए, तो इसके असर को कम किया जा सकता है।
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जटिलताओं से बचाव: समय पर पहचान से प्रेग्नेंसी हाइपरटेंशन, प्री-एक्लेम्पसिया, और प्रीमैच्योर डिलीवरी जैसी जटिलताओं से बचा जा सकता है।
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बच्चे का सुरक्षित विकास: uncontrolled शुगर से बच्चे का वजन अत्यधिक बढ़ सकता है, जिससे डिलीवरी मुश्किल हो सकती है और नवजात में भी शुगर से जुड़ी समस्याएँ हो सकती हैं।
स्क्रीनिंग कैसे की जाती है?
डायबिटीज स्क्रीनिंग के लिए डॉक्टर आमतौर पर ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (GTT) या ब्लड शुगर टेस्ट की सलाह देते हैं। यह एक सुरक्षित और सामान्य प्रक्रिया है, जो लगभग सभी अस्पतालों और क्लिनिक में उपलब्ध है।
महिलाओं के लिए सुझाव
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संतुलित आहार: फल, सब्ज़ियाँ और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले भोजन शामिल करें।
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नियमित व्यायाम: हल्की सैर या योग ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
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नियमित चेकअप: डॉक्टर के सभी एंटीनैटल विजिट्स और स्क्रीनिंग को मिस न करें।
गर्भावस्था में शुगर का खतरा सामान्य है, लेकिन सही जानकारी और समय पर स्क्रीनिंग से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। पहली एंटीनैटल विजिट में डायबिटीज टेस्ट करवाना केवल मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी नहीं, बल्कि सुरक्षित और सहज प्रेग्नेंसी सुनिश्चित करने का एक अहम कदम है।
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