अयोध्या में मकर संक्रांति का उल्लास: रामलला को अर्पित की गई पतंग, विशेष भोग के साथ हुआ पूजन


 मकर संक्रांति का पावन पर्व अयोध्या में इस वर्ष विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान रामलला ने भी इस पर्व को भक्तिभाव के साथ स्वीकार किया। परंपरा के अनुसार भगवान को पतंग अर्पित की गई और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद विशेष भोग लगाया गया। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई और दिनभर भारी संख्या में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने की संभावना जताई गई।

मकर संक्रांति को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व माना जाता है, जो शुभता, नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है। इसी भावना के साथ अयोध्या में धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला देखने को मिली। रामलला के समक्ष विशेष सजावट की गई और मंदिर को फूलों व दीपों से सजाया गया। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई, जिसके बाद भगवान को मौसमी फल, तिल, गुड़ और पारंपरिक व्यंजनों से बना भोग अर्पित किया गया।

रामलला को पतंग अर्पित करने की परंपरा ने इस पर्व को और भी खास बना दिया। पतंग को सूर्य, उत्साह और उमंग का प्रतीक माना जाता है। भक्तों का मानना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक अर्पण से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। पूजा के दौरान मंदिर परिसर में “जय श्रीराम” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

मकर संक्रांति के अवसर पर अयोध्या में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दर्शन व्यवस्था, साफ-सफाई और यातायात के विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन की ओर से भक्तों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील भी की गई है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि रामलला के दर्शन के साथ मकर संक्रांति मनाना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कई भक्तों ने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देने वाला अनुभव बताया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु इस पावन अवसर पर सरयू स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ में भी शामिल हुए।

कुल मिलाकर, अयोध्या में मकर संक्रांति का पर्व आस्था, परंपरा और उल्लास का संगम बनकर सामने आया। रामलला को अर्पित की गई पतंग और विशेष भोग ने इस दिन को ऐतिहासिक और भक्तों के लिए अविस्मरणीय बना दिया।

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