सोमनाथ स्वाभिमान पर्व आस्था, साहस और सिद्धांतों की अमिट विरासत


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से जुड़े ऐतिहासिक क्षणों को याद करते हुए “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह पर्व उन महान व्यक्तियों की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया और राष्ट्रीय स्वाभिमान को सर्वोपरि रखा। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और 1951 में हुए उसके भव्य उद्घाटन से जुड़ी दुर्लभ और ऐतिहासिक तस्वीरें भी साझा कीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2026 में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद हुए ऐतिहासिक उद्घाटन समारोह के 75 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इसी महत्वपूर्ण पड़ाव की स्मृति में आज से “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” का शुभारंभ किया गया है। यह पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आत्मगौरव और राष्ट्रनिर्माण की भावना का प्रतीक है।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल पत्थरों से बना एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा, उसकी आस्था और उसकी अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक है। इतिहास गवाह है कि इस पवित्र स्थल को कई बार नष्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार यह पहले से अधिक भव्य रूप में खड़ा हुआ। यह भारत की उस परंपरा को दर्शाता है, जिसमें विनाश के बाद भी निर्माण की शक्ति निहित है।

प्रधानमंत्री ने देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को विशेष रूप से स्मरण किया, जिनकी प्रेरणा और दृढ़ संकल्प से सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हो सका। उन्होंने कहा कि उस समय अनेक चुनौतियाँ थीं, लेकिन राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रश्न पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया गया। यही भावना आज के भारत को भी मार्गदर्शन देती है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के माध्यम से देशवासियों को अपने इतिहास से जुड़ने, अपने मूल्यों को समझने और आने वाली पीढ़ियों को सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का अवसर मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पर्व हमें याद दिलाता है कि भारत की पहचान उसके सिद्धांतों, आस्था और आत्मसम्मान में निहित है, और इन्हीं मूल्यों के सहारे राष्ट्र निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।

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