सूत्रों के अनुसार, बैठक में रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर खास जोर दिया गया। भारत और अमेरिका के बीच पहले से ही मजबूत रक्षा साझेदारी है, जिसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक का आदान-प्रदान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग शामिल है। दोनों पक्षों ने इस सहयोग को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने पर विचार साझा किए।
व्यापार और निवेश भी चर्चा का एक प्रमुख विषय रहा। भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कुछ व्यापारिक अड़चनों और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की जरूरत महसूस की जा रही है। बैठक में सप्लाई चेन को मजबूत करने, निवेश को बढ़ावा देने और तकनीक व इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। खासतौर पर उभरती तकनीकों और डिजिटल इकोनॉमी में साझेदारी को लेकर सकारात्मक संकेत मिले।
क्रिटिकल मिनरल्स पर हुई चर्चा को इस बैठक का सबसे अहम पहलू माना जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला इस समय रणनीतिक महत्व रखती है। भारत और अमेरिका दोनों ही इन मिनरल्स के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने के पक्षधर हैं। मंत्रीस्तरीय बैठक से पहले इस विषय पर साझा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा, जयशंकर और सर्जियो गोर ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया। इंडो-पैसिफिक में स्थिरता, बहुपक्षीय सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के दृष्टिकोण में समानता देखने को मिली।
कुल मिलाकर, यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती और भविष्य की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है। आने वाले समय में जयशंकर का अमेरिका दौरा और क्रिटिकल मिनरल्स पर होने वाली मंत्रीस्तरीय बैठक दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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