कांग्रेस का हमला: अमेरिका-पाकिस्तान के संयुक्त सैन्य अभ्यास पर भड़की पार्टी, जयराम रमेश बोले—‘स्वघोषित विश्वगुरु की कूटनीति पर सवाल’


 अमेरिका और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर भारत की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने न केवल इस सैन्य अभ्यास पर सवाल उठाए, बल्कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावों को लेकर भी पीएम मोदी को निशाने पर लिया।

जयराम रमेश ने कहा कि एक तरफ भारत खुद को वैश्विक मंच पर मजबूत कूटनीतिक ताकत के रूप में पेश करता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका का पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह वही पाकिस्तान है, जिस पर आतंकवाद को पनाह देने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में अमेरिका-पाकिस्तान की नजदीकी को भारत के लिए चिंता का विषय बताया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने ट्रंप के उस दावे का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को उन्होंने अपने दबाव से रोका था। ट्रंप ने पिछले साल 10 मई से कई बार यह दावा दोहराया है कि उनके हस्तक्षेप के कारण ही दो परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसी देशों के बीच शांति कायम हुई। यहां तक कि उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी पेश करते हुए भी इस बात को प्रमुखता से उठाया है।

जयराम रमेश ने कहा कि अगर ट्रंप के दावे सही हैं, तो फिर सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उस समय भारत की कूटनीतिक स्थिति क्या थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत की विदेश नीति इतनी कमजोर थी कि किसी विदेशी नेता के दबाव में फैसले लिए गए? कांग्रेस ने इसे “स्वघोषित विश्वगुरु” की छवि से जोड़ते हुए सरकार की विदेश नीति पर कटाक्ष किया।

कांग्रेस का कहना है कि सरकार को केवल बयानबाजी के बजाय पारदर्शिता के साथ सच्चाई देश के सामने रखनी चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि प्रधानमंत्री मोदी इस पूरे मुद्दे पर संसद और जनता को भरोसे में लें।

कुल मिलाकर, अमेरिका-पाकिस्तान सैन्य अभ्यास और ट्रंप के दावों ने एक बार फिर भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक रणनीति को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।

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