करणी सेना की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया है कि क्रिकेटर रिंकू सिंह से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर हिंदू देवताओं को एक गाड़ी में बैठे हुए दिखाया गया है। आरोप के मुताबिक, देवताओं को काला चश्मा लगाए हुए और बैकग्राउंड में अंग्रेजी गाना बजते हुए दर्शाया गया है। संगठन का कहना है कि यह प्रस्तुति धार्मिक आस्था का मजाक उड़ाने जैसी है और इससे करोड़ों सनातनियों की भावनाएं आहत हुई हैं।
करणी सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि रिंकू सिंह एक प्रसिद्ध खिलाड़ी हैं और युवाओं के लिए रोल मॉडल माने जाते हैं। ऐसे में उनसे जुड़ी किसी भी सामग्री का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। संगठन का आरोप है कि यदि यह पोस्ट उनकी जानकारी या सहमति से साझा की गई है, तो यह बेहद आपत्तिजनक है और इसके लिए सार्वजनिक माफी के साथ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तहरीर प्राप्त हो गई है और मामले की जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि वायरल पोस्ट किस अकाउंट से साझा की गई, उसमें रिंकू सिंह की प्रत्यक्ष भूमिका क्या है और क्या पोस्ट को किसी तीसरे पक्ष ने एडिट या एआई के जरिए तैयार किया है। जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
फिलहाल इस पूरे मामले पर रिंकू सिंह या उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़कर देख रहे हैं, तो वहीं कई यूजर्स धार्मिक भावनाओं के सम्मान की बात कर रहे हैं।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सोशल मीडिया और एआई तकनीक के दौर में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता कितनी जरूरी हो गई है, खासकर तब, जब बात आस्था और धार्मिक प्रतीकों से जुड़ी हो।
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