टीम इंडिया से बाहर होने के बाद भी क्यों सुर्खियों में हैं ऋतुराज? शतक जड़कर बनाया बड़ा रिकॉर्ड


 भारतीय वनडे टीम से ड्रॉप होने के कुछ ही दिनों बाद ऋतुराज गायकवाड़ एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। वजह है विजय हजारे ट्रॉफी में उनकी शानदार बल्लेबाजी, जहां उन्होंने 134 रनों की दमदार पारी खेलते हुए न सिर्फ अपनी फॉर्म का जवाब दिया, बल्कि एक बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। ऋतुराज ने इस शतक के साथ विजय हजारे ट्रॉफी में सबसे ज्यादा शतकों (15) के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। उनके इस प्रदर्शन ने टीम इंडिया के चयन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

विजय हजारे ट्रॉफी में दिखा ऋतुराज का क्लास

घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले ऋतुराज गायकवाड़ ने एक बार फिर साबित किया कि वह लंबे फॉर्मेट के भरोसेमंद बल्लेबाज हैं। 134 रनों की उनकी यह पारी तकनीक, धैर्य और आक्रामकता का शानदार मिश्रण थी। उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभाला और बड़े शॉट्स खेलकर विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाया। यह शतक न सिर्फ टीम के लिए अहम रहा, बल्कि व्यक्तिगत तौर पर भी ऋतुराज के करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई।

चयन से बाहर होने पर उठे सवाल

हाल ही में ऋतुराज को भारतीय वनडे टीम से बाहर किया गया था, जिसके बाद क्रिकेट जगत में कई सवाल उठे। माना जा रहा था कि टीम मैनेजमेंट भविष्य की योजनाओं और टीम संयोजन को ध्यान में रखते हुए अन्य खिलाड़ियों को मौका देना चाहता है। लेकिन विजय हजारे ट्रॉफी में ऋतुराज के इस प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं के फैसले पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। फैंस और पूर्व क्रिकेटर्स सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं कि इतनी शानदार फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज को टीम से बाहर रखना कितना सही है।

कड़ी प्रतिस्पर्धा में भी मजबूत दावेदारी

हालांकि, टीम इंडिया में जगह बनाना आसान नहीं है। देवदत्त पडिक्कल और मयंक अग्रवाल जैसे खिलाड़ी भी घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बना रहे हैं और चयन की रेस में मजबूती से बने हुए हैं। ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने विकल्पों की कमी नहीं है। इसके बावजूद, ऋतुराज का रिकॉर्ड और निरंतरता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।

आगे क्या?

ऋतुराज गायकवाड़ के इस शतक ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी स्तर पर रन बनाने की काबिलियत रखते हैं। अगर वह इसी तरह घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन करते रहे, तो टीम इंडिया में वापसी ज्यादा दूर नहीं लगती। फिलहाल, उनका बल्ला बोल रहा है और यही चयनकर्ताओं के लिए सबसे बड़ा संदेश है।

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