भारत दौरे पर आए यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेताओं ने शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
राजघाट परिसर में दोनों नेताओं ने कुछ क्षण मौन रखकर बापू को श्रद्धांजलि दी और गांधी जी के विचारों को स्मरण किया। इस अवसर पर भारतीय अधिकारियों और प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी रही। राजघाट के विजिटर बुक में हस्ताक्षर करते हुए ईयू नेताओं ने महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और शांति के सिद्धांतों की सराहना की।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष लुइस कोस्टा ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि गांधी जी के सिद्धांत न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम रहे, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति, लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए भी मार्गदर्शक बने हुए हैं।
वहीं, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने गांधी जी को आधुनिक विश्व के महानतम नैतिक नेताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ गांधी जी के मूल्यों—अहिंसा, सहिष्णुता और संवाद—को अपने वैश्विक दृष्टिकोण का अहम हिस्सा मानता है।
यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। ईयू नेतृत्व का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और यूरोपीय संघ व्यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति जैसे अहम मुद्दों पर सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
राजघाट पर श्रद्धांजलि देने की परंपरा को भारत आने वाले विदेशी नेताओं के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और कूटनीतिक संकेत माना जाता है। इससे भारत की ऐतिहासिक विरासत और गांधी जी के वैश्विक प्रभाव को सम्मान मिलता है।
कुल मिलाकर, ईयू अध्यक्ष लुइस कोस्टा और आयोग प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन का राजघाट दौरा न केवल महात्मा गांधी के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा, बल्कि भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में साझा मूल्यों और आपसी सहयोग की भावना को भी दर्शाता है।
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