दावोस में ट्रंप का बड़ा बयान: ‘ग्रीनलैंड को अमेरिका के सिवाय कोई और देश नहीं बचा सकता’


 विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में दावोस से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी आक्रामक ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और वैश्विक भू-राजनीति को लेकर सख्त रुख साफ कर दिया। दुनिया भर से जुटे राजनीतिक नेताओं, उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं को संबोधित करते हुए ट्रंप ने न सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का दावा किया, बल्कि यूरोप, सुरक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों को लेकर कई विवादित टिप्पणियां भी कीं।

अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में उसे सुरक्षित रखने की क्षमता सिर्फ अमेरिका के पास है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “ग्रीनलैंड को अमेरिका के सिवाय दुनिया का कोई और देश बचा नहीं सकता।” इस बयान को रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है और वहां प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ सामरिक महत्व भी लगातार बढ़ रहा है।

ट्रंप ने अपने भाषण में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने रिकॉर्ड स्तर पर निवेश आकर्षित किया है, रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और देश फिर से वैश्विक आर्थिक ताकत के रूप में उभर रहा है। ट्रंप ने कॉर्पोरेट जगत से अपील की कि वे अमेरिका में निवेश करें, क्योंकि वहां “कम टैक्स, कम नियम और ज्यादा अवसर” मौजूद हैं।

यूरोपीय संघ को लेकर ट्रंप का लहजा काफी आलोचनात्मक रहा। उन्होंने कहा कि यूरोप आज गंभीर आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है और उसकी नीतियां उसे कमजोर बना रही हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को लेकर ठोस फैसले नहीं लेते, तो भविष्य में उन्हें और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

अपने संबोधन में ट्रंप ने वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया और कहा कि अमेरिका अब उन समझौतों और व्यवस्थाओं का हिस्सा नहीं बनेगा, जिनका बोझ सिर्फ अमेरिकी करदाताओं पर पड़ता हो। उन्होंने नाटो और सहयोगी देशों से भी अपनी जिम्मेदारी साझा करने की बात दोहराई।

कुल मिलाकर, दावोस में ट्रंप का भाषण साफ संकेत देता है कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे से पीछे हटने वाले नहीं हैं। ग्रीनलैंड को लेकर दिया गया बयान हो या यूरोप पर की गई टिप्पणी, ट्रंप ने यह दिखा दिया कि आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में अमेरिका की भूमिका और भी सख्त और स्पष्ट रहने वाली है।

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