मेडिकल साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का मेल अब हेल्थकेयर की दुनिया में क्रांति ला रहा है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि एआई की मदद से इंसान की जीभ देखकर ही डायबिटीज और पेट के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेतों का पता लगाया जा सकता है। यह तकनीक भविष्य में बीमारी की पहचान को आसान, सस्ता और तेज बना सकती है।
जीभ से बीमारी पहचानने का क्या है कनेक्शन?
आयुर्वेद और पारंपरिक चीनी चिकित्सा में लंबे समय से माना जाता रहा है कि जीभ शरीर की अंदरूनी सेहत का आईना होती है। जीभ का रंग, बनावट, नमी और उस पर मौजूद परत कई बीमारियों के संकेत दे सकती है। अब इसी सिद्धांत को आधुनिक एआई टेक्नोलॉजी के जरिए वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है।
कैसे काम करता है यह AI सिस्टम?
इस तकनीक में मरीज की जीभ की हाई-क्वालिटी फोटो ली जाती है। इसके बाद एआई एल्गोरिदम उस इमेज का विश्लेषण करता है।
AI खास तौर पर इन चीजों पर ध्यान देता है:
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जीभ का रंग (पीला, लाल, बैंगनी आदि)
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सतह की बनावट
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दरारें या सूजन
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असामान्य धब्बे
इन संकेतों की तुलना पहले से मौजूद हजारों मेडिकल डेटा से की जाती है, जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि व्यक्ति को डायबिटीज, पेट की समस्या या पेट के कैंसर के शुरुआती लक्षण तो नहीं हैं।
डायबिटीज और पेट के कैंसर में कैसे मददगार?
शोधकर्ताओं के अनुसार, डायबिटीज में जीभ का रंग और टेक्सचर बदल सकता है, जबकि पेट के कैंसर के शुरुआती चरण में जीभ पर कुछ खास तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं। एआई इन सूक्ष्म बदलावों को इंसानी आंखों से पहले पकड़ सकता है, जिससे बीमारी की समय रहते पहचान संभव हो सकती है।
क्या डॉक्टरों की जगह ले लेगा AI?
वैज्ञानिक साफ कहते हैं कि यह तकनीक डॉक्टरों का विकल्प नहीं, बल्कि एक सपोर्ट सिस्टम है। इसका मकसद शुरुआती स्क्रीनिंग को आसान बनाना है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज समय रहते मेडिकल टेस्ट और इलाज करा सके।
भविष्य में क्या बदलेगा?
अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो आने वाले समय में मोबाइल ऐप या क्लिनिक में लगे कैमरे से ही प्राथमिक जांच संभव हो सकती है। इससे खासतौर पर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में लोगों को बड़ा फायदा मिल सकता है।
निष्कर्ष
AI आधारित जीभ जांच तकनीक हेल्थकेयर में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। डायबिटीज और पेट के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान अगर समय पर हो जाए, तो इलाज ज्यादा प्रभावी और जीवन रक्षक साबित हो सकता है। हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है।
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