AI की जंग में चीन ने अमेरिका को दी कड़ी टक्कर, गूगल डीपमाइंड के CEO का बड़ा बयान


 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया की दो महाशक्तियों—अमेरिका और चीन—के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हसाबिस ने AI रेस को लेकर एक अहम और चौंकाने वाला बयान दिया है। उनके अनुसार, चीन अब अमेरिका से AI के क्षेत्र में वर्षों नहीं, बल्कि केवल कुछ महीनों का ही अंतर रह गया है। यह बयान साफ तौर पर दिखाता है कि वैश्विक तकनीकी संतुलन तेजी से बदल रहा है।

डेमिस हसाबिस का कहना है कि कुछ साल पहले तक AI के क्षेत्र में अमेरिका की बढ़त कई वर्षों की मानी जाती थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। चीन ने बीते कुछ समय में AI रिसर्च, डेटा प्रोसेसिंग, कंप्यूटिंग पावर और टैलेंट डेवलपमेंट में जबरदस्त निवेश किया है। नतीजतन, तकनीकी क्षमता के स्तर पर वह अमेरिका के बेहद करीब पहुंच गया है।

हालांकि, हसाबिस ने यह भी स्पष्ट किया कि AI की असली लड़ाई सिर्फ बेहतर इंजीनियरिंग या तेज सिस्टम बनाने तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, चीन के पास बेहद मजबूत इंजीनियरिंग टैलेंट और बड़े पैमाने पर सिस्टम लागू करने की क्षमता है, लेकिन आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती होगी—नई खोज (Discovery) और मौलिक आविष्कार (Innovation)। यही वह क्षेत्र है, जहां अमेरिका और उसके सहयोगी देश अब भी बढ़त बनाए हुए हैं।

AI के क्षेत्र में मौलिक रिसर्च, नए एल्गोरिद्म, और पूरी तरह नए कॉन्सेप्ट विकसित करना बेहद जरूरी है। हसाबिस का मानना है कि केवल मौजूदा तकनीक को बेहतर बनाना काफी नहीं होगा, बल्कि ऐसी नई खोजों की जरूरत होगी जो AI को अगली पीढ़ी तक ले जाएं। यही वजह है कि अमेरिका की ताकत अब भी उसके रिसर्च इकोसिस्टम, यूनिवर्सिटीज और ओपन इनोवेशन कल्चर में मानी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की तेजी से बढ़ती AI क्षमता वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल सकती है। AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और आर्थिक प्रभुत्व से भी जुड़ चुका है। ऐसे में अमेरिका और चीन के बीच AI की यह जंग आने वाले वर्षों में और तेज हो सकती है।

कुल मिलाकर, गूगल डीपमाइंड के सीईओ का बयान इस बात का संकेत है कि AI की दौड़ अब अंतिम चरण में प्रवेश कर रही है। अमेरिका की बढ़त अब सुरक्षित नहीं रही और चीन बेहद तेजी से उसे चुनौती दे रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नवाचार और खोज की इस जंग में कौन बाजी मारता है।

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