दिल्ली विधानसभा का चार दिवसीय शीतकालीन सत्र उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ, लेकिन पहले ही दिन सदन का माहौल काफी हंगामेदार रहा। राजधानी में लगातार गंभीर बने वायु प्रदूषण के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। AAP विधायक मास्क पहनकर विधानसभा पहुंचे और सरकार पर प्रदूषण नियंत्रण में विफल रहने का आरोप लगाया।
सत्र की शुरुआत उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण से हुई, जिसमें उन्होंने दिल्ली के विकास, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों का जिक्र किया। हालांकि, जैसे ही अभिभाषण शुरू हुआ, विपक्षी विधायकों ने वायु गुणवत्ता के बिगड़ते हालात को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। AAP विधायकों का कहना था कि दिल्ली में प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है और इस पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
हंगामे के दौरान विधायक अपनी सीटों से खड़े होकर नारे लगाते रहे, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित होने लगी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कई बार विधायकों से शांत रहने और नियमों का पालन करने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा। इसके बाद स्पीकर ने सख्त रुख अपनाते हुए हंगामा कर रहे AAP विधायकों को सदन से बाहर निकालने का आदेश दे दिया।
सदन से बाहर निकाले जाने के बाद भी AAP विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन जारी रखा। उनका आरोप था कि प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा से बचने की कोशिश की जा रही है। विधायकों ने कहा कि दिल्ली के लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने के बजाय सिर्फ बयानबाजी कर रही है।
वहीं, सत्तापक्ष की ओर से कहा गया कि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है, लेकिन इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सदन की कार्यवाही को बाधित करना उचित नहीं है। सरकार का दावा है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं और केंद्र व राज्य सरकार के बीच समन्वय से इस समस्या से निपटा जा रहा है।
पहले ही दिन हुए इस हंगामे से यह साफ हो गया है कि शीतकालीन सत्र के दौरान प्रदूषण, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। आने वाले दिनों में सदन में इन मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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