रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन 2025 में सबसे अधिक वित्तीय नुकसान सामने आया। तेजी से बढ़ती इंटरनेट पहुंच, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म्स ने जहां सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं साइबर अपराधियों को नए-नए तरीके अपनाने का मौका भी दिया है। आम लोग अक्सर ज्यादा मुनाफे, त्वरित रिटर्न या डर के माहौल में आकर इन ठगों के जाल में फंस जाते हैं।
सबसे बड़ा खतरा निवेश स्कैम (Investment Scam) के रूप में उभरकर सामने आया है। फर्जी शेयर ट्रेडिंग ऐप, क्रिप्टो निवेश, मल्टी-लेवल मार्केटिंग और नकली फंड मैनेजमेंट योजनाओं के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये ठगे जा रहे हैं। साइबर अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और फर्जी वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर भरोसेमंद कंपनियों जैसा दिखने वाला जाल बिछाते हैं।
इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट स्कैम, फर्जी पुलिस या CBI अधिकारी बनकर कॉल करना, KYC अपडेट के नाम पर बैंक डिटेल्स चुराना और OTP फ्रॉड जैसे मामले भी तेजी से बढ़े हैं। कई मामलों में पीड़ित मानसिक दबाव में आकर अपनी पूरी जमा पूंजी गंवा देते हैं। खास बात यह है कि इस ठगी का शिकार सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा और पढ़े-लिखे लोग भी हो रहे हैं।
सरकार और गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर जैसी पहलें शुरू की हैं। इसके साथ ही बैंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की जागरूकता सबसे जरूरी है।
अनजान लिंक पर क्लिक न करना, निवेश से पहले पूरी जांच करना, OTP या बैंक डिटेल्स किसी से साझा न करना और संदिग्ध कॉल की तुरंत रिपोर्ट करना—ये छोटे कदम बड़ी साइबर ठगी से बचा सकते हैं। बढ़ते आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि साइबर सुरक्षा अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है।
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