आजकल बच्चों और युवाओं में आंखों की रोशनी जल्दी कमजोर होना एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। पहले यह समस्या ज्यादातर उम्रदराज लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब 5-6 साल के बच्चों में भी मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) जैसी परेशानियां बढ़ गई हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यह तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और डिजिटल आदतों का नतीजा है।
1. स्क्रीन टाइम का बढ़ता प्रभाव
मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर और टीवी पर अधिक समय बिताना बच्चों की आंखों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। लगातार नजदीक की चीज़ों पर फोकस करने से आंखों की मसल्स तनाव में आ जाती हैं, जिससे निकट दृष्टि दोष यानी मायोपिया तेजी से बढ़ता है।
2. पर्याप्त रोशनी और आउटडोर एक्टिविटी की कमी
अक्सर बच्चे बंद कमरे में समय बिताते हैं और प्राकृतिक रोशनी में खेल-कूद कम होती है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि सूरज की रोशनी में समय बिताने से आंखों की मसल्स मजबूत रहती हैं, और दूर की चीज़ों पर नजर डालने की आदत भी बनती है। बाहर न खेलने से आंखें जल्दी कमजोर हो जाती हैं।
3. गलत खान-पान और नींद की कमी
आंखों की सेहत के लिए सही पोषण बहुत जरूरी है। विटामिन A, C और D, ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसी पोषक तत्वों की कमी भी दृष्टि कमजोर होने का कारण बन सकती है। इसके अलावा, बच्चों और युवाओं की नींद पूरी न होना भी आंखों की थकान और दृष्टि दोष को बढ़ाता है।
बचाव के उपाय
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स्क्रीन टाइम लिमिट करें: बच्चों को मोबाइल या टीवी पर लगातार दो घंटे से ज्यादा समय न दें।
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आउटडोर एक्टिविटी बढ़ाएं: रोजाना कम से कम 1-2 घंटे खुले में खेलना और प्राकृतिक रोशनी में समय बिताना जरूरी है।
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संतुलित आहार और पर्याप्त नींद: हरी सब्जियां, फलों और ओमेगा-3 युक्त भोजन शामिल करें और नींद पूरी होने दें।
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आंखों की नियमित जांच: बच्चों की आंखों की समय-समय पर ऑप्टोमेट्रिस्ट या नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराएं।
निष्कर्ष
कम उम्र में आंखों की रोशनी कमजोर होना अब आम समस्या बन गई है। स्क्रीन टाइम, आउटडोर एक्टिविटी की कमी और गलत खान-पान इसके मुख्य कारण हैं। बच्चों और युवाओं में इस समस्या को रोकने के लिए संतुलित लाइफस्टाइल और नियमित आंखों की देखभाल बेहद जरूरी है।
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